ढबारसी (अमरोहा)। जिंदगी के बीस साल में ताहिर हुसैन मजदूर से करोड़पति बन गया। पैतृक गांव का घर और जमीन भले ही बेच दी हो, लेकिन दिल्ली में अकूत संपत्ति बना ली। वर्ष 2017 में हुए नेहरूनगर नगर निगम के पार्षद चुनाव में दिए गए हलफनामे में ताहिर ने 18 करोड़ की संपत्ति दर्शायी थी।
इस समय दिल्ली हिंसा में आम आदमी पार्षद ताहिर हुसैन सबसे अधिक सुर्खियों में हैं। दिल्ली पुलिस ने ताहिर को चांदबाग हिंसा का आरोपी बनाया है। ताहिर के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज किया गया है। ताहिर हुसैन मूल रूप से अमरोहा के आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव पौरारा का रहने वाला है। कक्षा आठ तक पढ़ने वाला ताहिर गांव में मेहनत मजदूरी करता था। परिवार की माली हालात बहुत खराब थी। अपनी इस गरीबी और सौतेली मां के व्यवहार से तंग आकर करीब बीस साल पहले ताहिर गांव छोड़कर दिल्ली पहुंच गया। फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले फर्नीचर बनाने का काम सीखा। फिर फर्नीचर का काम शुरू कर दिया। फर्नीचर के कारखाने से फैक्ट्री बना ली। देखते ही देखते चांदबाग के रइसों में शामिल हो गया। बीस साल में मजदूर से करोड़पति बन गया। वर्ष 2017 में नेहरूनगर नगर निगम से केजरीवाल की आप पार्टी से पार्षद का चुनाव लड़ा और जीता। इस चुनाव में लगाए गए हलफनामे में ताहिर ने अपनी संपत्ति 18 करोड़ दर्शायी थी। फिलहाल पौरारा गांव से दिल्ली तक ताहिर चर्चा में हैं।
दंगे में फंसे तहिर से ‘अपनों’ ने बनाई दूरी
ढबारसी। दिल्ली में ताहिर हुसैन के बढ़ते रसूख को देखते हुए आमदपुर क्षेत्र के जो लोग उसे अपना रिश्तेदार बताते थे, आज वही लोग ताहिर से दूरी बनाने लगे हैं। दिल्ली के चांदबाग हिंसा में ताहिर के आरोपी बनने पर उसके रिश्तेदार पुलिस के पचड़े से बचने के लिए अब अपने संबंध बताने से बच रहे हैं। ये लोग ताहिर से समय-समय पर आर्थिक मदद लेते रहे हैं। बताया जाता है कि ताहिर हुसैन क्षेत्र में मौजूद रिश्तेदारों की मदद करता रहता था। वह रिश्तेदारों और जान पहचान के लोगों के यहां होने वाली खुशी और गमी दोनों में शामिल होता था। आज जब वह चांदबाग हिंसा में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या करने, दंगा भड़काने, हत्या के सबूतों को नष्ट करने की धाराओं में वांछित है तो सगे रिश्तेदार भी उससे अपनी दूरी बनाए हुए हैं। ये लोग मीडिया या अन्य से ताहिर हुसैन के संबंध में बातचीत करने से कतरा रहे हैं।