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नोटबंदी और स्कूल प्रशासन की हठ ने ली छात्र की जान

Sat, 24 Dec 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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new note color fade - फोटो : AmarUjala
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नोटबंदी का असर कहें या स्कूल प्रशासन की हठ। सच कुछ भी लेकिन इनके बीच एक मासूम छात्र की जान चली गई। कैश न मिलने से शहबाजपुर डोर गांव का एक परिवार बच्चों की फीस न जमा कर सका। फीस के लिए स्कूल में छात्र की पिटाई कर दी गई।
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बचने के लिए भागे कक्षा यूकेजी का छात्र गिर कर घायल हो गया। घर में उपचार के दौरान आठ दिन बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि पीड़ित परिवार ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं मासूम की मौत से पीड़ित परिवार सदमे में है। 

एनएच-24 पर स्थित गांव शहबाजपुर डोर निवासी संजीव कुमार पुत्र ओमप्रकाश ट्रक पर ड्राइवरी करके परिवार को भरण पोषण करता है। बड़ा बेटा अभिषेक (10) गांव के ही एक निजी स्कूल में यूकेजी का छात्र था। बेटी आकांक्षा भी उसी स्कूल में नर्सरी की छात्रा थी। जबकि छोटा बेटा गोलू घर पर ही है। परिजनों की माने तो अभिषेक और आकांक्षा की प्रति माह स्कूल फीस और रिक्शे का भाड़ा मिला कर 600 रुपये थे।
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नोटबंदी के चलते करीब ढाई माह से फीस जमा नहीं हो सकी। इसी बीच संजय की पत्नी बरखा फीस जमा करने विद्यालय गईं थीं। विद्यालय प्रबंधन ने पुरानी करेंसी लेने से मना कर दिया। आरोप है कि 15 दिसंबर को फीस जमा न होने पर विद्यालय प्रबंधन ने अभिषेक की संटियों से पिटाई लगा दी। पिटाई से भयभीत होकर बचाव में अभिषेक दौड़ कर विद्यालय के बाथरूम में घुस गया। इसी दौरान अभिषेक बाथरूम में फिसलकर गिर गया।

जिससे उसका कूल्हा उतर गया था। परिवार वाले उसे गांव के ही चिकित्सक के ले गए। जहां चिकित्सक ने हालत गंभीर होने पर बाहर ले जाने की सलाह देकर भेज दिया। परिजनों ने अभिषेक का गजरौला के एक निजी नर्सिंग होम में उपचार कराया। अमरोहा में भी निजी नर्सिंग होम में दिखाया। 

पिता ने बताया कि डाक्टरों ने ऑपरेशन करने की बात कही थी। खर्चा अधिक होने पर वह बेटे अभिषेक को घर ले आए। जहां 22 दिसंबर की दोपहर करीब दो बजे अभिषेक ने दम तोड़ दिया। उसी दिन परिजनों ने छात्र को तिगरी गंगा में प्रवाह कर दिया। परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की है। 
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