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स्कूली वाहनों पर सख्ती की तो 200 ने कराई फिटनेस

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अमरोहा। जिले में संचालित स्कूलों में मानकों की अनदेखी कर बिना फिटनेस वाले वाहनों से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। इनमें तमाम स्कूल ऐसे हैं, जिनमें प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन स्कूलों में स्कूली बस, वाहनों का इस्तेमाल हो भी रहा है, उनमें से कई वाहन अनफिट है। किसी की फिटनेस नहीं तो किसी का बीमा नहीं है।
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गाजियाबाद में बच्चे की मौत के बाद परिवहन विभाग की निद्रा टूटी तो सख्ती शुरू हुई। विभिन्न स्कूलों के करीब 300 वाहनों को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद सख्ती बढ़ी तो करीब 200 वाहनों की फिटनेस कराई है।
बच्चों के जीवन की रक्षा के लिए के लिए नियम तो बनाए गए, लेकिन ये कागजों तक सीमित रह गए हैं। निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली, लेकिन बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में करीब 437 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इसमें बस, वैन व अन्य वाहन शामिल हैं। हैरत की बात ये है कि सैकड़ों स्कूली वाहन बिना फिटनेस के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इन वाहनों में कैमरे नहीं लगे हैं और फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। स्कूलों की बदइंतजामी और परिवहन विभाग की लापरवाही बच्चों के लिए खतरा बनी हुई है।
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इतना ही नहीं शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों वाहन ऐसे हैं, जो रजिस्टर्ड नहीं हैं और वह बिना पंजीकरण के ही दौड़ रही हैं। कुछ दिन पहले गाजियाबाद में स्कूली वैन में सवार एक बच्चा हादसे का शिकार हुआ तो जिम्मेदार सड़कों पर दिखने लगे हैं। इस बीच परिवहन विभाग ने 300 वाहनों को नोटिस जारी किए। एआरटीओ एके राजपूत ने बताया कि सख्ती के बाद करीब विभिन्न स्कूलों ने 200 वाहनों की पिटनेस करा ली है। अन्य की प्रक्रिया जारी है। अगर अब वाहनों के मानक पूरे नहीं मिलते तो मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
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