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Amroha News: शिकायत के निस्तारण में लापरवाही पर सख्ती, आठ अधिकारियों का वेतन रोका

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अमरोहा। आइजीआरएस पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और समाधान दिवस में प्राप्त जन शिकायतों के निस्तारण की खराब गुणवत्ता को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतकर्ताओं से मिले फीडबैक में यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकांश मामलों में निस्तारण संतोषजनक नहीं है। इस स्थिति पर जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने गहरी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
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डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त उद्योग, जिला पंचायत राज अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, अधिशासी अभियंता जल निगम, जिला कार्यक्रम अधिकारी, उपायुक्त स्वतः रोजगार, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास विभाग सहित आठ अधिकारियों के वेतन आहरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही 20 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया गया है। वहीं 66 अन्य अधिकारियों को चेतावनी देते हुए अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी माह में जनपद की ओवरऑल रैंक 44 रही, जो अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। हालांकि राजस्व विभाग की रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह 11वें स्थान पर पहुंच गई है, लेकिन विकास कार्यों से जुड़े विभागों की स्थिति खराब रही है, जहां रैंक 68 तक गिर गई है। जनवरी माह में जनपद की ओवरऑल रैंक 57 थी, जिसमें राजस्व विभाग 26वें और विकास विभाग 65वें स्थान पर था। इस तुलना से स्पष्ट है कि विकास कार्यों में सुधार के बजाय गिरावट आई है। डीएम ने खराब प्रदर्शन वाले विभागों को चिन्हित कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कारण बताओ नोटिस पाने वालों में बीएसए, अधिशासी अभियंता सिंचाई, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण, खनन निरीक्षक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी और ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक शामिल हैं। इसके अलावा जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, पीओ डूडा, जिला समन्वयक, बीडीओ अमरोहा व गंगेश्वरी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। डीएम ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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