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बयान : पवनदीप के हादसे में 7 मिनट में पहुंच गई थी 108 एंबुलेंस

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अमरोहा। गायक पवनदीप राजन के सड़क हादसे में घायल होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। बृहस्पतिवार को जांच कमेटी के सामने एंबुलेंस के चालकों ने बयान दर्ज कराए।
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इसमें सामने आया कि गजरौला पुलिस ने 108 एंबुलेंस को कॉल की थी। इसके बाद सिर्फ सात मिनट में एंबुलेंस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन इससे पहले निजी एंबुलेंस का चालक घायल गायक पवनदीप और उनके साथियों को उठाकर निजी अस्पताल ले गया था। हालांकि, 108 एंबुलेंस के जरिए ट्रक के चालक को भर्ती कराया गया था।
जबकि, एनएचएआई के 1133 नंबर पर किसी ने भी कॉल नहीं की थी। वहीं, निजी एंबुलेंस चालक ने अपने बयानों में बताया कि हादसे के समय वह कुछ ही दूरी पर था। जैसे ही लोग मौके की तरफ दौड़े तो वह खुद भी गाड़ी लेकर पहुंच गया और अपना फर्ज निभाते हुए घायलों को एंबुलेंस में लेकर निजी अस्पताल में भर्ती कर दिया था। वहीं, जांच कमेटी के अध्यक्ष डिप्टी कलक्टर मसीहा नजम के छुट्टी पर जाने के बाद उनकी जगह दूसरे अधिकारी को कमेटी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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पांच मई की रात उत्तराखंड के चंपावत जिले के सिलेन टाक निवासी गायक पवनदीप राजन अपने साथी अजय मेहरा के साथ घर से कार से दिल्ली जा रहे थे। उन्हें एक कार्यक्रम में शामिल होने हैदराबाद पहुंचना था। कार चालक राहुल सिंह चला रहा था। रात करीब ढाई बजे उनकी कार गजरौला में चौपला चौराहा ओवरब्रिज से नीचे उतरी तो हाईवे किनारे सीओ ऑफिस के सामने खड़े कैंटर में घुस गई थी। हादसा चालक राहुल को झपकी आने के कारण हुआ था। हादसे में पवनदीप, उनके साथी अजय व चालक राहुल घायल हो गए थे।
सड़क सुरक्षा समिति में उठा था सरकारी एंबुलेंस न पहुंचने का मामलाॉ
गजरौला पुलिस ने निजी एंबुलेंस से तीनों घायलों को डिडौली में हाईवे स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया था। गायक पवनदीप के हादसे में घायल होने का मामला पिछले दिन हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उठा था। सामने आया था कि हादसे के बाद 108 एंबुलेंस नहीं पहुंची थी और एनएचएआई टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1033 से भी कोई मदद नहीं मिली थी। इसके बाद डीएम निधि गुप्ता वत्स ने सड़क दुर्घटना के बाद 1033 और 108 एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण की जांच के लिए जांच के निर्देश दिए थे। डिप्टी कलेक्टर मसीहा नजम की अध्यक्षता में पांच सदस्य टीम गठित कर टीम को 15 दिन में एंबुलेंस की अनुपलब्धता की तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी थी।
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