सावन के पहले सोमवार के लिए जिलेभर के शिवालय तैयार है। तड़के से ही मंदिरों में जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। इसके लिए रविवार को दिनभर मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट का दौर चला। उधर, भगवान शिव पर अभिषेक करने के लिए गंगा जल लेकर लौट रहे कांवड़ियों के कदम मंजिल की ओर बढ़ते रहे। दिल्ली हाईवे सहित जिलेभर के कई मार्गों पर बम-बम भोले और बोल बम की गूंज रहीं। कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स भी मुस्तैद रही।
नगर और देहात क्षेत्रों के शिव मंदिरों में रविवार को खासी रौनक रही। पहले सोमवार को लेकर दिनभर मंदिरों में साफ-सफाई और उन्हें संवारने का काम चलता रहा। सोमवार को जलाभिषेक के लिए भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए महत्वपूर्ण शिवालयों में पुलिस की ओर से व्यवस्था की गई है। यूं तो मंदिरों में पूरे एक माह तक शिवभक्तों का जलाभिषेक के लिए तांता लगा रहेगा लेकिन पहले सोमवार का खासा महत्व रहता है।
11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो गई। इसके बाद शिवभक्त कांवड़ लाने के लिए निकल पड़े थे। अब उनके लौटने का सिलसिला भी हो गया। जलाभिषेक को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। 14 जुलाई को पहले सोमवार को मंदिरों में कांवड़ियों व श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी तो महिलाएं भी मंदिरों में पूजा अर्चना व भजन कीर्तन के लिए पहुंचेंगी।
प्रमुख मंदिरों वासुदेव मंदिर, बाबा गंगानाथ मंदिर, शिवालय व प्राचीन कालिका मंदिर में को श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। वासुदेव मंदिर के पुजारी पंडित विद्यानंद झा ने बताया कि मंदिरों पर सुबह से ही कांवड़ियों का जुटना शुरू हो जाता है। जलाभिषेक करने के बाद ही कांवड़ यात्रा का समापन माना जाता है।