अमरोहा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू असली के दिल्ली कूच करने के एलान पर पुलिस ने पदाधिकारियों पर पहरा बैठा दिया। पुलिस ने भाकियू असली के नेताओं को घर में नजरबंद कर लिया। रजबपुर क्षेत्र के गांव चकमजदीपुर में जिलाध्यक्ष तो धनौरा क्षेत्र के कुआखेड़ा और बछरायूं में अन्य पदाधिकारियों के घरों पर पुलिस ने मंगलवार रात से पहरा लगा दिया। तीन बजे तक पुलिस उन्हें नजर बंद किए रही। जिस पर किसान नेताओं ने विरोध जताया।
मंडल अध्यक्ष दिल्ली जाते समय सिकंदराबाद में गिरफ्तार
मंडी धनौरा। भारतीय किसान यूनियन असली के मंडलाध्यक्ष डूंगर सिंह पुलिस को चकमा देकर रात को ही दिल्ली के लिए निकल गए लेकिन उनको सिकंदराबाद के पास पुलिस ने अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया। भाकियू नेताओं ने इसे सरकार की तानाशाही करार दिया है। भारतीय किसान यूनियन असली के जिला प्रवक्ता नरेश कुमार सिंह को उनके गांव कुआखेड़ा में मंगलवार की रात में ही घर पर नजरबंद कर दिया गया। इसी गांव में जिला उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार को भी पुलिस ने नजरबंद कर दिया। ग्राम चुचैला कलां में रहने वाले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शब्बन चौधरी को उनके समर्थकों के साथ पुलिस ने नजरबंद कर दिया। ब्लॉक अध्यक्ष जसपाल सिंह गिल को ग्राम मल्हुपुरा में पुलिस ने दिल्ली नहीं जाने दिया। उनके घर के बाहर भी दो पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। भाकियू की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष मेजर सिंह के घर पर पुलिस का पहरा रहा। उनको भी पुलिस ने दिल्ली नहीं जाने दिया। जिला प्रवक्ता नरेश कुमार ने फोन पर बताया कि सरकार उनके लोकतांत्रिक अधिकार समाप्त कर रही है। उन्होंने सरकार से तत्काल किसानों की मांगें पूरी करने की मांग की।
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चकमजदीपुर में दिन निकलते ही पुलिस ने लगाया पहरा
रजबपुर। दिल्ली आंदोलन में शामिल होने के लिए भाकियू असली के चौधरी जिलाध्यक्ष महावीर सिंह ने कार्यकर्ताओं संग कूच करने का एलान किया था। बुधवार सुबह छह बजे ही पुलिस उनके आवास पर पहुंच गई। वह निकलने की तैयार कर ही रहे थे कि पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर लिया। दोपहर तीन बजे तक पुलिस उनके आवास पर तैनात रही। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह तानाशाही है। सरकार लगातार किसानों की आवाज को दबाने क काम कर रही है। किसानों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस द्वारा जबरन उन्हें रोका गया है।
जानकारी मिली थी कि भाकियू असली के पदाधिकारी दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए पुलिस उनके घरों पर वार्ता करने पहुंची थी। किसानों को नजरबंद नहीं किया गया है। पुलिस और किसानों के बीच वार्ता हुई। जिसके बाद किसान मान गए।
-राजीव कुमार सिंह, एएसपी