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Amroha News: एसडीएम ने तुड़वाई थी खेतों में बनाई यूपीसीडा की सड़क

Wed, 20 Nov 2024 01:35 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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गजरौला में यूपीसीडा द्वारा जमीन अ​धिग्रहण कर बनाई टंकी। संवाद - फोटो : संवाद
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गजरौला (अमरोहा)।
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यूपीसीडा की ओर से किसानों को 30 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित करने और अधिगृहीत जमीन का बैनामा न करने में अब नया खुलासा हुआ है। यूपीसीडा ने गजरौला क्षेत्र के तिगरिया भूड़ के रकबे में खेतों में सड़क बनाई थी। कोर्ट में किसानों को मिली जीत के बाद तत्कालीन एसडीएम ने सड़क को ध्वस्त करा दिया था। वहीं, खेतों में बनी यूपीसीडा की टंकी में अभी तक पानी नहीं आया है।
यूपीसीडा ने 1981 से 1990 तक नाईपुरा, फाजलपुर गौसाईं और गजरौला के सैकड़ों किसानाें की जमीन अधिगृहीत की थी। करीब एक हजार बीघा जमीन तिगरिया भूड़ के रकबे में है। वहीं, करीब इतनी ही जमीन औद्योगिक क्षेत्र में है। तिगरिया भूड़ निवासी लाला उर्फ वीरेंद्र गुर्जर, रामवीर सिंह, धर्मवीर सिंह, सूरतराम सिंह, छत्र सिंह, रुस्तम सिंह आदि किसानों ने बताया कि जमीन का अधिग्रहण करते समय उनसे कोई समझौता नहीं किया गया था। गांव के दो ही लोगों से यूपीसीडा के अधिकारियों ने बात की थी। बिना समझौता किए ही जमीन को अधिग्रहण हुआ था।
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सूरतराम सिंह, छत्र सिंह व रुस्तम सिंह की 45 बीघा जमीन 1981 में अधिग्रहण की गई थी, जिसके मुआवजे के रूप में पौने दो लाख रुपये दिए गए थे। वहीं, दूसरी किश्त के रूप में दो लाख रुपये दिए थे। जबकि, मुआवजा राशि एक साथ दी जाती है। इसी तरह गुलाब सिंह की नौ बीघा जमीन 1990 में अधिग्रहण की, जबकि मुआवजा 2014 में दिया गया। किसानों का कहना है कि वह यूपीसीडा के उत्पीड़न ने बर्बाद हो गए। उधर, 30 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटने के बाद भी अधिगृहीत जमीन का बैनामा ने कराने के मामले में यूपीसीडा के तीन रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
कोर्ट में केस जीता किसान तो प्रशासन ने ध्वस्त कराई सड़क


गजरौला।
फाजलपुर गौसाईं निवासी दो भाई नत्थू सिंह व महेंद्र सिंह की 15.5 बीघा जमीन तिगरिया भूड़ के रकबे में है। यूपीसीडा ने तिगरिया भूड़ के रकबे में दोनों भाइयों की जमीन सहित एक हजार बीघा भूमि अधिगृहीत की थी। किसानों को अपनी इच्छा के अनुसार मुआवजा दिया, मगर दोनों भाइयों ने औनी-पौनी रकम लेने से मना कर दिया। उधर, यूपीसीडा ने अधिगृहीत जमीन पर सड़क बनवा दी। दोनों भाई यूपीसीडा के खिलाफ कोर्ट में चले गए। दोनों भाइयों के कोर्ट में केस जीतने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2012 में जिला प्रशासन को यूपीसीडा की बनाई सड़क ध्वस्त कराने के आदेश दिए। इस पर तत्कालीन मंडी धनौरा एसडीएम ने लेखपालों की टीम बुलाकर पैमाइश कराई और सड़क को ध्वस्त कराया था। आज दोनों किसानों का परिवार अपनी जमीन पर काबिज है और खेती कर रहा है।
नहीं चली टंकी, पाइप हो गए चोरी

यूपीसीडा ने तिगरिया भूड़ के रकबे में जमीन अधिग्रहण कर कई सड़क बना दीं। इसके अलावा पानी की टंकी भी बनवाई। अधिग्रहण किए गए पूरे इलाके में पानी पहुंचाने के लिए पाइप भी दबवाए गए। मगर, उचित मुआवजा नहीं मिलने व बैनामा नहीं होने के कारण किसानों ने कब्जा नहीं छोड़ा। यूपीसीडा के खिलाफ न्यायालय में चले गए। टंकी बन जाने के बाद एक बार भी नहीं चलाई गई। उसके दबाए गए पाइप भी चोरी हो गए।
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मुआवजा नहीं दिया और छीन ली 15 बीघे जमीन

गजरौला में यूपीसीडा के जमीन अधिग्रहण करने के साथ ही किसानों के बुरे दिन शुरू हो गए। रघुवीर सैनी की धनौरा मार्ग के पास 15 बीघे जमीन थी। उनकी जमीन पर 15 साल पूर्व जबरन कब्जा कर लिया गया। जिस पर मशीन टूल्स नाम से फैक्टरी चलाने के लिए भवन बनाए गए। बाउंड्री भी करा दी गई। दिल्ली निवासी ने फैक्टरी चलाने के लिए कब्जा की गई भूमि पर फैक्टरी बनाकर कब्जा कर लिया। फैक्टरी कभी नहीं चली। उस पर रखवाली के लिए चौकीदार रहता है। किसान का कहना है कि उसे एक भी रुपये का मुआवजा नहीं मिला है।
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