बान नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अमर उजाला की ओर से चलाया जा रहा अभियान रंग लाने लगा है। तहसील प्रशासन ने नदी की खुदाई के लिए तटवर्ती 42 गांवों को चिह्न्ति करते हुए सूची डीएम को सौंप दी है। डीएम ने कार्ययोजना तैयार करने के लिए 25 मई को कलक्ट्रेट में बैठक बुलाई है। इसमें तटवर्ती गांवों के प्रधान सहित विभिन्न विभागों के अफसर हिस्सा लेंगे।
उत्तराखंड के कोटद्वार से निकलने वाली बान नदी बिजनौर जिले से प्रदेश की सीमा में प्रवेश करती है। यहां नदी में फैक्ट्रियों का दूषित पानी छोड़े जाने से नदी प्रदूषित है तो अमरोहा में नदी के निशान ही बाकी बचे हैं। नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अभियान को प्रशासन ने हाथोंहाथ लिया है। तहसील प्रशासन की ओर से नदी के तटवर्ती गांवों 42 गांवों और इनके लेखपाल, कानून गो की सूची डीएम को सौंप दी है। अब 25 मई को कलक्ट्रेट की अध्यक्षता में नदी को पुनर्जीवित करने का खाका खींचा जाएगा।
इन गांवों में कराई जाएगी खुदाई ः नाजरपुर खुर्द, पट्टी रायपुर कला, मऊ मयचक, रायपुर कला, उक्सी, रायपुर, बुडेरना, लालू नंगला, पिलक सराय, एबजाबाद, कासमपुर मेव, सिरसा जट, कलामपुर उर्फ करार नगर, गजाना, मुवारकपुर कला, शाहिदपुर, शहजादपुर, हाजरपुर, सुल्तानपुर इंतजाम अली खां, भटपुरा सकैनिया, अकबरपुर सकैनिया, नगली मीरा शाह, मझौला खुर्द, रसूलपुर मजरा मझौली, देवीपुरा, फूलपुर अदलपुर, जलीलपुर बक्काल, निजामपुर सैंदरी, कालीलेट, चक कालीलेट, वाजिदपुर, सिरसा मनिहार, सिरसा मोहन, औरंगाबाद, चक शिकरिया, शिकरिया, तारापुर, बिजड़ा, फरीदपुर इम्मा शामिल हैं।