अमरोहा। जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी-पीएचसी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। जिले में सीएमओ के अधीन चिकित्सकों के 141 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 77 डॉक्टर तैनात हैं। वहीं जिला अस्पताल में 58 पदों के सापेक्ष सिर्फ 26 चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में शासन की आयुष्मान भारत योजना का सपना भी पूरा होते नहीं दिखता।
डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिलने पर दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
जिले में जिला अस्पताल के अलावा आठ सीएचसी और 45 पीएचसी हैं। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सकों के चारों पद खाली हैं। चेस्ट फिजिशियन और जनरल सर्जन का एक-एक पद भी रिक्त है। अस्पताल बनने के बाद से अब तक कार्डियोलॉजिस्ट और चेस्ट फिजिशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। इससे हृदय और सांस संबंधी गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
फिजिशियन के दो पद स्वीकृत हैं। एनेस्थेटिक्स के आठ पदों में से तीन पर चिकित्सक तैनात हैं। ऑर्थोपेडिक सर्जन के तीनों पद भरे हुए हैं। नेत्र सर्जन का एक पद खाली है, जबकि ईएनटी चिकित्सक भी अध्ययन के लिए बाहर गई हैं। नेत्र चिकित्सक के अभाव में आंखों के मरीजों को परेशानी हो रही है।
एनएचएम के तहत चिकित्सकों के 55 पद हैं, जिनमें 44 चिकित्सक कार्यरत हैं। विशेषज्ञों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए इंतजार या रेफर होने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
सीएमएस डॉ. एके भंडारी ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को पत्र भेजा गया है। उपलब्ध चिकित्सकों से ही काम लिया जा रहा है और अस्पताल आने वाले मरीजों को हर संभव उपचार देने का प्रयास किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में 32 पद रिक्त
जिला अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 58 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 26 पदों पर ही डॉक्टर तैनात हैं, जबकि 32 पद खाली हैं। अस्पताल में मरीजों की संख्या के मुकाबले चिकित्सकों की उपलब्धता कम होने से मौजूदा डॉक्टरों पर भी काम का दबाव बढ़ रहा है।
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ये पद हैं भरे, इनकी तलाश
गायनेकोलॉजिस्ट के चार पद हैं, तैनाती एक पर भी नहीं। एनेस्थेटिक्स के आठ पर, लेकिन तीन ही चिकित्सक ही हैं। ईएनटी का एक पद हैं, फिलहाल रिक्त चल रहा है। सर्जन एक पद खाली है। नेत्र रोग विशेषज्ञ के दो पद हैं, जिसमें एक एक खाली चल रहा है। अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ के दो पद हैं, एक पद खाली है। सर्जन का एक पद है और वह भी खाली चल रहा है। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं, जिससे अस्पताल की विशेषज्ञ सेवाओं का दायरा सीमित हो गया है।
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साल में चार बार भेजी जाती है डिमांड
चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए जिला अस्पताल और सीएमओ स्तर से शासन को लगातार मांग भेजी जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार साल में करीब चार बार चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने के लिए डिमांड भेजी जाती रही है। इसके बावजूद लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है।
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चिकित्सकों की कमी के संबंध में शासन को पत्र भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग को फिलहाल बांड के तहत 23 चिकित्सक मिले हैं। यह दो साल तक अपनी सेवाएं देंगे। इससे काफी सुधार आएगा। वर्तमान में सभी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। डॉ. रमाकांत सागर, सीएमओ