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निजी चिकित्सकों की दो घंटे सांकेतिक हड़ताल, मरीज बेहाल

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अमरोहा। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को ऑपरेशन की अनुमित वाले बिल के विरोध में आईएमए चिकित्सकों ने मंगलवार को दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की। कोविड और इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी को बंद रखा। चिकित्सकों ने इस बिल को खिचड़ी तंत्र बताया। कड़ी नाराजी जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। सरकार को बिल में सुधार करने के लिए चेताया। अन्यथा आर-पार की चेतावनी दी।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार को निजी चिकित्सक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर रहे। अध्यक्ष डॉ. जीके त्यागी और सचिव डॉ आशीष त्रिवेदी के नेतृत्व में तमाम चिकित्सक एक बैंक्वेट हॉल में एकत्र हुए। यहां विरोध प्रदर्शन किया। कहा कि सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा दे, पर खिचड़ी तंत्र न बनाए। तमाम निजी चिकित्सकों ने आयुर्वेदिक चिकित्सकों को ऑपरेशन की अनुमति देने संबंधित बिल पर कड़ी नाराजगी जताई। शासन से इस बिल में सुधार करने की अपील की। कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सबसे प्राचीन पद्धति है। लेकिन उसके आगे बढ़ाने के लिए आयुर्वेद डॉक्टरों ने प्रयास नहीं किए। वर्तमान में भी अधिकतर आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथिक प्रैक्टिस ही करते हैं। इस तरह आयुर्वेदिक डॉक्टरों ने खुद ही इस पद्धति को बेकार कर रखा है। अगर सरकार इस पद्धति पर आगे काम करना चाहती है, तो कुछ सख्त नियम बनाए। आयुर्वेदिक डॉक्टर को अपनी पद्घति के अनुसार काम करने के लिए बाध्य करें। केवल क्रॉनिक बीमारियों में ही आयुर्वेदिक को बढ़ावा दिया जाए। इसलिए सरकार आयुर्वेद डॉक्टरों से आयुर्वेदिक को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करें। उनको जनरल सर्जरी की डिग्री न देकर आयुर्वेद जनरल सर्जरी की डिग्री दी जाए। मॉडर्न मेडिसन के चिकित्सा में गुणवत्तापूर्ण प्रणाली लागू हो। हमें डॉक्टरों की संख्या के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना है। जिससे अच्छी क्वालिटी वाले चिकित्सक बन सकें। प्राइवेट चिकित्सकों की सांकेतिक हड़ताल के चलते मरीजों को दिक्कतों को सामना करना पड़ा। हालांकि, सभी जगह कोविड-19 और इमरजेंसी इलाज बदस्तूर जारी रहा।
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