गांव श्यौनाली निवासी रहीस ने डीएम और सीएमओ को शिकायतीपत्र दिया था। जिसमें आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी गर्भवती थी। जिसके सात मार्च को प्रसव पीड़ा हुई तो उनसे जोया के सरकारी अस्पताल के पास स्थित एक निजी अस्पताल में पत्नी भर्ती कराया था। जहां पर स्वास्थ्यकर्मियों ने ऑपरेशन से प्रसव कराने के लिए 16 हजार रुपये फीस भी जमा करा ली थी, लेकिन प्रसव के दौरान चिकित्सकों की लापरवाही से उसके शिशु की मौत हो गई थी।
वहीं पत्नी तरन्नुम को गलत दवाईं और इंजेक्शन दे दिया था, जिसके उसकी भी तबीयत खराब हो गई थी। इस पर परिजनों ने उसे मुरादाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसका उपचार कराया गया है। मंगलवार को एसडीएम सुधीर कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची अस्पताल को सील कर दिया। सीएमओ ने बताया कि बिना पंजीकरण अस्पताल का संचालन होता पाया गया है, वहीं शिकायत के आधार सील की कार्रवाई की गई है।
अवैध अस्पतालों की भरमार
जिले में कुल 110 अस्पताल ही पंजीकृत हैं। इसके अलावा सभी अस्पताल अवैध और फर्जी ढंग से चलाए जा रहे हैं। जब कोई घटना घटित हो जाती है, तो अधिकारियों की नींद खुलती है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने में दिलचस्पी लेते हैं। अवैध अस्पतालों के कारण लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।
बिना नाम संचालित था अस्पताल
अस्पताल को एसडीएम सदर की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सील कराया गया है। संबंधित मामले में ब्यान दर्ज कराए जाएंगे, अस्पताल संचालक पर कोई डिग्री और पंजीकरण नहीं था। आगे कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ