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बगद की सुन लो कोई पुकार

Tue, 17 May 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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अविरल धारा से अमरोहा, संभल और बदायूं जिले के सैंकड़ों गांवों के लिए कभी जीवन रेखा बनी बगद नदी का पानी जहरीला हो गया है। इसकी वजह फैक्ट्रियों से छोड़ा जाने वाला दूषित पानी बताया जा रहा है। नदी का पानी प्रदूषित होने से तटवर्ती गांवों के हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं। इससे तमाम ग्रामीण कैंसर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है। 
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मंडी धनौरा क्षेत्र के गांव तिगरी कलां से निकलने वाली बगद नदी जिले के तमाम गांवों और संभल के से होती हुई बदायूं जिले के कछला घाट पर पुन: गंगा नदी में मिल जाती है। नदी का रकबा मंडी धनौरा और हसनपुर तहसील के राजस्व रिकार्ड में भी दर्ज है।

रिकार्ड में यह करीब 20 मीटर चौड़ी है, लेकिन मौके पर कुछ ही मीटर बची है। नदी की जमीन पर अवैध कब्जा करके लोग खेती भी करने लगे हैं। नदी में फैक्ट्रियों का गंदा पानी छोड़ जाने से यह प्रदूषित हो गई है। इसका असर तटवर्ती गांवों में देखने को मिल रहा है।
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इससे एक ओर जहां गांवों के हैंडपंप दूषित पानी उगलने लगे हैं, वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो रही है। दूषित पानी पीने से लोग कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। 

ये गांव हैं प्रभावित
शहबाजपुर डोर, सुल्तानपुर ठेर, भीमा ठीकरी, सोहरका, बाईखेड़ा, करनखाल, फूलपुर,  गुलामपुर, सिकरौली, अगरौला, रूखालू, गांगटकोला, शकरगढ़ी, गंगवार, पतेई  खादर, सुतावली, नवाबपुरा, तरौली, खनौरा, उकावली, गंगेश्वरी, भावली, पौरारा, चचौरा, गुरैठा, दढ़ियाल, सलारा, जबकि जिला संभल के रजपुरा ब्लाक के सैंकड़ों गांव प्रभावित हैं।

आंदोलनों का नहीं दिखा दम
बगद नदी को बचाने के लिए पिछले एक दशक से आंदोलन किए जाते रहे हैं। लेकिन कोई भी आंदोलन दम नहीं दिखा सका और नदी में प्रदूषण बढ़ता गया। इसके लिए मौजूदा कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर से लेकर तमाम दिग्गज और आम लोग आंदोलन चला चुके हैं। केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी बगद की हालत देख चुकी  हैं।

संसद मेें गूंजा था मुद्दा
सांसद कंवर सिंह तंवर भी बगद नदी के प्रदूषण के मुद्दे को लोकसभा में उठा चुके हैं। उन्होंने सभापति से कहा था कि मेरे लोकसभा क्षेत्र में बगद नदी  बहती थी, जो कि विकास खण्ड गंगेश्वरी, हसनपुर, गजरौला के गांवों से होकर आगे गंगा नदी में जाकर मिल जाती है। जोकि अब नाला बनकर रह गई है। इसमें कई औद्योगिक फैक्ट्रिय्रां दूषित पानी डालती हैं। इस कारण विकास खंड गंगेश्वरी, हसनपुर, गजरौला के तमाम गांवों में कैंसर, हेपेटाइटिस-सी जैसी जानलेवा  बीमारियां फैल रही हैं। 

क्या कहते हैं लोग
जलधारा आंदोलन से जुड़े डा.शाकिर अमरोही बताते हैं नदी पर बांध बनाकर सरकारों ने कृत्रिम  संकट पैदा  किया है। इसका एक मात्र इलाज जल की धारा को बंधन मुक्त करना है। किसान नेता चौधरी दिवाकर सिंह कहते हैं, पानी  बहना बंद  हुआ तो लोगों ने इन नदियों पर अवैध कब्जे कर लिए। अब तो शायद  प्रशासन को भी नहीं मालूम कि नदी कहां से गुजरती थी। गजरौला निवासी सुरेंद्र सिंह कहते हैं, हमने तो एक एक गंदा नाला ही देखा है। नदी कब थी नहीं मालूम। 

-बगद नदी के दूषित पानी से गजरौला, हसनपुर और गंगेश्वरी ब्लाक के तमाम गांव प्रभावित है। अब इन गांवों में ओवरहेड टैंक स्थापित कर पानी की व्यवस्था की जा रही है। कई गांवों में कार्य पूरा भी हो चुका है।-आरके जैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम।

जल्द ही बगद नदी की मशीनों से सफाई कराई जाएगी। इसके लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। औद्योगिक इकाइयों को भी नदी की सफाई कराने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। मनरेगा से नदी में जेसीबी नहीं चलाई जा सकती है, लेकिन ऐसा कोई रास्ता निकाला जाएगा ताकि नदी की जेसीबी से सफाई कराई जा सके।-वेदप्रकाश, डीएम।
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