अमरोहा(अनिल चौहान)। तिगरी गंगा मेले में इस बार आस्था के साथ सियासी हलचल भी तेज होगी। पंचायत चुनाव की आहट और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नेता व दावेदार श्रद्धालुओं के हुजूम में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला तिगरी मेला इस बार राजनीतिक दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। सदियों से लगते आ रहे तिगरी गंगा मेले में उड़द और चावल की खिचड़ी की खुशबू श्रद्धालुओं की भूख जगाती है तो दूसरी ओर सियासी खिचड़ी भी पकती है। मंडल समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी भीड़ नेताओं और चुनावी दावेदारों के लिए जनसंपर्क का बड़ा अवसर बन जाती है। मेल-मिलाप, मुलाकातों और चर्चाओं के बीच राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशें भी तेज हो जाती हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने संबंधी आदेश के बाद संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ी है। ऐसे में तिगरी मेले में परिवारों और ग्रामीणों के साथ मेल-मिलाप बढ़ाने की कोशिशें चुनावी रणनीति का हिस्सा बन सकती हैं। सामूहिक आयोजन और अनौपचारिक मुलाकातें भी समर्थन जुटाने का माध्यम बनेंगी।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी मेला अहम माना जा रहा है। भाजपा, सपा, बसपा और रालोद समेत विभिन्न दलों के नेता कार्यकर्ताओं व समर्थकों से संपर्क साधेंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के शिविरों में राजनीतिक चर्चाएं होंगी। इसके साथ ही पार्टी के भीतर गुटबाजी कम करने, आपसी समीकरण साधने और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिशें भी होंगी। धनौरा विधानसभा क्षेत्र में लगने वाले मेले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर भी नजर रहेगी।
भाजपा विधायक राजीव तरारा, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर, पूर्व विधायक संगीता चौहान, एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों और हसनपुर विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी चर्चा में रहेगी। सपा विधायक समरपाल सिंह सहित दूसरे दलों के नेता भी मेले के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में गंगा की रेती पर आस्था की डुबकी के साथ चुनावी समीकरणों को साधने की कवायद भी दिखाई देगी। (संवाद)
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सामाजिक संगठनों के मंच पर भी साधेंगे समीकरण
मेले में क्षत्रिय, यादव, प्रजापति, जाट, जाटव समेत विभिन्न समाजों के संगठनों के शिविर और आयोजन भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेंगे। इन आयोजनों में नेताओं की भागीदारी से सामाजिक संपर्क मजबूत करने और स्थानीय मुद्दों को समझने के अवसर मिलेंगे। विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी नेता क्षेत्र के लोगों से संवाद बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। वर्ष 2017 में सरकारी मेला घोषित होने के बाद इसका आयोजन प्रशासन की निगरानी में होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान 24 नवंबर को
तिगरी गंगा मेले का आयोजन 15 से 25 नवंबर तक होगा। मुख्य स्नान पर्व 24 नवंबर को है। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए घाटों पर बैरिकेडिंग, अस्थायी मार्ग, पेयजल, बिजली, प्रकाश और स्वच्छता की व्यवस्था समय से पूरी करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही अस्थायी शौचालय, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस और अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, खोया-पाया केंद्र और संचार व्यवस्था सुनिश्चित करने करने की तैयारी जोरों पर है।
मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक
जिला पंचायत अध्यक्ष, ललित तंवर (भाजपा)
हसनपुर विधानसभा क्षेत्र, महेंद्र खड़गवंशी (भाजपा)
मंडी धनौरा विधानसभा क्षेत्र, राजीव तरारा (भाजपा)
नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र, समरपाल सिंह (सपा)
अमरोहा विधानसभा क्षेत्र, महबूब अली (सपा)
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करीब 24 लाख है जिले की आबादी
अमरोहा लोकसभा क्षेत्र में अमरोहा जिले की चार विधानसभा सीटों नौगावां सादात, मंडी धनौरा, हसनपुर और अमरोहा के साथ हापुड़ जिले की गढ़ मुक्तेश्वर विधानसभा सीट शामिल है। अमरोहा जिले की आबादी करीब 24 लाख है। जिले में 576 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 10,47,068 महिला और पुरुष मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं, जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कुल मतदाताओं की संख्या करीब 12,48,111 है। इतनी बड़ी आबादी और मतदाता संख्या के चलते जिले में चुनावी गतिविधियों के लिहाज से ग्रामीण क्षेत्रों की अहम भूमिका रहती है।