गोकशी करने जा रहे आरोपियों के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ के दाैरान मौजूदगी दिखाकर गिरफ्तार किए गए एक आरोपी की कोर्ट ने पुलिस रिमांड निरस्त कर दी। साथ ही उसे रिहा कर दिया। कोर्ट ने पुलिस की केस डायरी में विश्वसनीय एवं प्रामाणिक साक्ष्य नहीं होने की बात कही और गिरफ्तारी को पुलिस की मनमानी माना।
कोर्ट ने सैदनगली इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा और दरोगा सतवीर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी और एसपी को भी पत्र लिखा। मामला सैदनगली थाने से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार 25 जनवरी को सैदनगली इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा, दरोगा अरुण कुमार, हरपत सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सगश्त कर रहे थे। तभी उन्हें हसनपुर रोड स्थित किसान कोल्ड स्टोर के पास जंगल में गोकशी किए जाने की सूचना मिली। सूचना पर पुलिसकर्मियों ने मौके पर छापा मार दिया।
इस दौरान दरोगा सतवीर कुमार को भी बुला लिया। इस दौरान एक गोवंशीय पशु आम के पेड़ के नीचे खड़ा मिला। आरोपियों ने गोकशी करने के लिए उसके पैर बांध रखे थे और वध करने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की तो फायरिंग शुरू कर दी।
बाद में कंट्रोल रूम को सूचना देकर अन्य पुलिस फोर्स को भी मौके पर बुला लिया गया। मुठभेड़ में पुलिस की गोली लगने से सैदनगली निवासी दानिश घायल हो गया था। चार आरोपी माैके से भाग निकले। इस मामले में पुलिस ने सैदनगली के मोहल्ला कुरैशियान निवासी दानिश को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था।
साथ ही मोहल्ला कुरैशियान निवासी जीशान, दाऊद उर्फ शानू, मोहल्ला मदीना मस्जिद के रहने वाले सलीम और सकतपुर गांव के रहने वाले सुरेंद्र उर्फ सुरेश वाल्मीकि के खिलाफ गोहत्या निवारण अधिनियम व पुलिस पर जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में पुलिस ने 27 जनवरी को आरोपी सुरेंद्र उर्फ सुरेश को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और मुकदमे की विवेचना कर रहे विवेचक सतवीर सिंह ने आरोपी की रिमांड मांगी। 28 जनवरी को मुठभेड़ के मामले में हसनपुर इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह ने सुरेंद्र की रिमांड मांगी। मुकदमे की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने की।
कोर्ट ने पुलिस की सुरेंद्र उर्फ सुरेश की घटना स्थल पर मौजूदगी को गलत पाया। कोर्ट ने सुरेंद्र को 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा कर दिया। साथ ही मुकदमा के वादी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा और दरोगा सतवीर सिंह के खिलाफ दो माह में जांच कराकर कठोर कार्रवाई करने के लिए डीजीपी और एसपी के पत्र लिखा।