समय के साथ ही पुलिस का पब्लिक से संपर्क कटता चला गया। हालात यह हो गए कि पुलिस क्षेत्र की जानकारी से अनभिज्ञ हो गई। परिणाम स्वरूप मौजूदा समय में अधिकांश बीट कांस्टेबलों को यह नहीं पता कि उनके क्षेत्र में कितने गांव हैं। भले-बुरे की भी पहचान नहीं रही।
नतीजा अपराधों में वृद्धि होती चली गई। जिसके कारण एसपी संतोष कुमार मिश्र को पुलिस और पब्लिक की दूरी खत्म करने की याद आई है। उन्होंने जनपद की समस्त कोतवाली और थानों में तैनात बीट कांस्टेबलों को पब्लिक से जोड़ने की कवायद शुरू की है।
बीट कांस्टेबलों को उनके हलके के गांवों की नई पीढ़ी को व्हाट्स एप ग्रुप से जोड़ने को कहा है। जिससे कोई भी घटना हो जाने पर या संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने पर गांवों के युवा पुलिस को सूचित कर सकें।
इसके अलावा पुलिस अधीक्षक जिले के एसओ या कोतवाली प्रभारी निरीक्षक के साथ ही थाने/ कोतवाली के बीट कांस्टेबल से सीधे जानकारी करेंगेे। घटना हो जाने पर बीट कांस्टेबल की ही जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी।
हर थाने और कोतवाली में तैनात बीट कांस्टेबल का मोबाइल नंबर मेरे पास होगा। उसके हलके में होने वाली हर छोटी बड़ी घटना के लिए उसी की ही जिम्मेदारी होगी। जब जिम्मेदारी का अहसास होगा तो वह अपराध नियंत्रण में भी मन से काम करेगा। जहां गलती पाई जाने पर डांट लगेगी वहीं अच्छे कार्य के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।
-संतोष कुमार मिश्र पुलिस अधीक्षक।