मोहल्ला पीरजादा स्थित आबिदी हाउस में बृहस्पतिवार रात सजी इस नूरानी महफिल की शुरुआत कलाम-ए-इलाही से की गई। वसीम अमरोहवी ने कहा, रंगे पा ऐसी गुलाबी के गुलाबी हो गुलाब, फूल खुशबू को तरसते हो पसीना ऐसा। हबीब अहमद ने यू कहा, दीने हक के वास्ते पैदा किया हक ने उन्हें दीन पर कुर्बां हुआ है खानदाने मुस्तफा। मसूद हसन तल्हा ने ऐसे कहा, लफ्जो को पहले धोइये इतर ओ गुलाब से, फिर कीजिए अर्ज-ए-शौक रिसालत मआब से।
मिर्जा अनस ने पढ़ा, इतने दिलनशी है उनके बोल, रूह में उतर उतर गए। हाफिज शमीम अमरोहवी ने ऐसे पढ़ा, हूं गुलाम उनका अजल से वो ही आका मेरे, तोड़ सकता नहीं उनसे कोई रिश्ता मेरा। इसके अलावा रिजवान अब्बास, सैय्यद मसरूर जौहर, पंडित भुवन कुमार शर्मा, शानदार अमरोहवी, गुलरेज अब्बासी, हसन काजिम तकवी ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। महफिल की अध्यक्षता सांस्कृतिक संस्था कारवाने खुलूस के अध्यक्ष सैय्यद महबूब हुसैन जैदी ने की जबकि संचालन शिबान कादरी ने किया। इस दौरान डाॅ.मिस्बाह सिद्दीकी, शानदार मुज्तबा, मोहम्मद अहमद जैदी, शाहरुख खान अमरोहवी, अली आबिदी अमरोहवी आदि मौजूद रहे। इमदाद आबिदी ने सभी का आभार जताया।