सर्दी का सितम लगातार बढ़ रहा है। खासकर बच्चे ठंड की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में भी भीड़ है। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि जिले की आठ सीएचसी में से सिर्फ एक पर ही बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। जिससे बीमारी से ग्रसित बच्चों को लेकर परिजन जिला अस्पताल की ओर रुख करने को मजबूर हैं। या फिर निजी चिकित्सकों के सहारे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के लाख दावाें के बाद भी जिले में स्वास्थ्य बदहाल है। जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है। जिला अस्पताल को छोड़ दें तो जिले की सभी आठ सीएचसी में भी स्टाफ बहुत कम है। या फिर कहें फिजिशियन तक भी टोटा है। जिले में अमरोहा, हसनपुर, मंडी धनौरा, बछरायूं, जोया, गजरौला, नौगांवा सादात और ढबारसी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन, गजरौला को छोड़ किसी पर भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है।
अब सवाल यह है कि बिना डॉक्टरों के ग्रामीण इलाकों के नौनिहालों का उपचार कैसे हो। खास बात यह है कि बाल रोग ही नहीं फिजिशियन की भी तैनाती नहीं हैं। बताया जाता है कि बछरायूं में दो वर्ष एक फिजिशियन की तैनाती हुई थी, लेकिन वह भी कुछ समय बाद नौकरी छोड़कर चले गए।
रेफर होने वाले शिशुओं को ज्यादा परेशानी
बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म लेने के दौरान अगर किसी नवजात की हालत गंभीर हो जाती है, तो उसे उपचार समय पर नहीं मिल पाता है। इसके अलावा बालरोग विशेषज्ञों की कमी के चलते बुखार, सांस रोग, ब्रेन और इंफेक्शन की समस्या लेकर पहुंचने वाले नवजात बच्चों के उपचार को लेकर होती है।
जिले में आठ सीएचसी है। जिनमें मात्र गजरौला में ही बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है। इसके लेकर शासन को पत्र लिखा गया है। -डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ