नगला माफी के अभिभावकों, बच्चों व ग्रामीणों ने परिषदीय विद्यालय को चौकपुरी में विलय किए जाने का विरोध किया। उन्होंने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कहा कि चौकपुरी की दूरी करीब दो किलोमीटर है। रास्ते में नहर, भूड़ व बाग हैं। इनमें कई बार तेंदुआ देखा गया है। बच्चों को दो किमी दूर भेजना सुरक्षित नहीं है। गांव पहुंचीं बीईओ ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत किया।
गांव नगला माफी के लोग बुधवार सुबह परिषदीय विद्यालय में पहुंचे। नारेबाजी कर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने कहा कि उनके गांव के विद्यालय का चौकपुरी गांव के परिषदीय विद्यालय में विलय किया जा रहा है जो गलत है। चौकपुरी जाने के लिए बागों के रास्ते से गुजरना पड़ता है। बराबर में नहर भी है। यहां पर कई बार तेंदुआ देखा जा चुका है। हंगामे की सूचना पर बीईओ आरती गुप्ता भी पहुंचीं।
उन्होंने ग्रामीणों को समझाया। कहा कि यह निर्णय उनका नहीं है। बल्कि शासन का है। इस दौरान हरपाल सिंह, प्रमेंद्र सिंह, राधिका, कविता, सुनीता, श्याम सिंह, मीना, बवीता, करतार सिंह आदि मौजूद रहे। ग्राम प्रधान गौरव सिंह ने बताया कि वह ग्रामीणों की इस समस्या को डीएम से मिलकर उनके सामने रखेंगे। गांव के स्कूल का विलय होने से बच्चों को चौकपुरी भेजना सुरक्षित नहीं है।