अमरोहा। पंजू सराय प्रकरण में न्याय की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को शुरू होने से पहले ही टल गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि सुबह पुलिस और प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया। बाद में अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
कर्जदार विपिन कुमार और अशोक कुमार ने बताया कि वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे थे, लेकिन प्रशासनिक निगरानी के कारण जिला मुख्यालय नहीं पहुंच सके। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पीड़ित परिवार और बैंक पक्ष के बीच वार्ता हुई। प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया। दोनों पक्षों की सहमति से तैयार मसौदे के अनुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित संपत्ति की बिक्री विलेख के माध्यम से वापसी की जाएगी। एफआईआर से जुड़े प्रकरण के निस्तारण पर भी सहमति बनी।
वार्ता के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए फिलहाल भूख हड़ताल स्थगित कर दी। हालांकि चेतावनी दी कि यदि तय समय में समझौते की शर्तें पूरी नहीं हुईं या प्रशासन ने आश्वासन नहीं निभाया, तो वे दोबारा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे।
ये है मामला
विपिन कुमार ने वर्ष 2019 में पंजाब नेशनल बैंक की अमरोहा शाखा से 45.11 लाख रुपये का ऋण लिया था। कोविड-19 के दौरान ऋण खाता एनपीए हो गया। उनका दावा है कि उन्होंने 2.50 लाख रुपये की किस्तें जमा कीं और 8.45 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी भी खाते में समायोजित हुई। आरोप है कि जनवरी 2022 में ऋण सेटलमेंट के नाम पर बैंक प्रबंधक और अधिवक्ता पुनीत पूर्वी ने चार लाख रुपये रिश्वत मांगी।
विपिन का आरोप है कि 11 जुलाई 2025 को 15 लाख रुपये नकद बैंक में जमा कराने के नाम पर ले लिए गए, लेकिन रकम जमा नहीं कराई गई। बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर मकान की नीलामी कर संपत्ति की रजिस्ट्री तानिया वर्मा और आर्यन वर्मा के नाम करा दी गई। 14 मई को जबरन बेदखली, मारपीट और अभद्रता का भी आरोप है। इसी घटना से आहत होकर अशोक कुमार ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी। 30 जून को मकान वापस दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस मामले में बैंक मैनेजर, अधिवक्ता समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।