जिले में 576 ग्राम पंचायतें हैं, जहां ग्रामीणों की सुविधाओं को देखते हुए सचिवालयों का निर्माण कराया गया। मंशा थी कि गांवों में बनाए गए पंचायत भवनों में ही ग्रामीणों को सभी सुविधाएं व योजनाओं का लाभ मिले, लेकिन हकीकत में मंशा अधूरी रह गई है। पंचायत सचिवालयों पर कामकाज के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन लापरवाही और उदासीनता के कारण इन सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
पेंशन व अन्य जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीणों को जनसेवा केंद्रों की ओर रूख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की ओर से की गई पड़ताल में अधिकांश पंचायत सचिवालयों पर ताले लगे मिले। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सहायक भी नदारद रहते हैं।
सुविधाओं का अभाव, सीसीटीवी कैमरा भी खराब
गजरौला। अहरौला तेजवन गांव में ग्राम पंचायत सचिवालय बना है, लेकिन उसमें सुविधाओं का अभाव है। यहां पर लगा सीसीटीवी भी खराब हो गया है। पंचायत सचिवालय में लगे कंप्यूटर चलता तो है, लेकिन नेटवर्क की दिक्कत रहने से लोगों के काम नहीं हो पाते। इस कारण सचिवालय में जाने की बजाय लोगों को नगर में जाकर काम कराना पड़ता हैं। संवाद
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बंद मिला सचिवालय
आदमपुर। गंगेश्वरी विकासखंड क्षेत्र के गांव काई मुस्तकम में दोपहर 12 बजे ग्राम सचिवालय बंद मिला। ग्रामीण डालचंद सिंह का कहना ग्राम सचिवालय अक्सर बंद रहने से ग्राम सचिवालय से संबंधित कार्यों के लिए ब्लाॅक व तहसील स्तर पर जाना पड़ता है। उधर, आदमपुर के गांव सुल्तानपुर भीमा में ग्राम सचिवालय में स्थित पंचायत सहायक के कार्यालय पर दोपहर एक बजे ताला लटका मिला। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सहायक द्वारा ग्राम सचिवालय में बैठकर कोई भी कामकाज नहीं किया जाता। जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव, नहीं मिल रहा लाभ
हसनपुर। ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश ग्राम सचिवालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते ग्रामीणों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे नूरपुर खुर्द गांव के ग्राम सचिवालय पर ताले लटके पाए गए। ग्रामीणों ने बताया कि सचिवालय का फर्श भी अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है। उधर, दोपहर 2:30 बजे शेखुपुर झकड़ी के ग्राम सचिवालय पर भी ताला लगा मिला। यहां भी ग्रामीणों ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ग्राम सचिवालय का उन्हें कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को सुलभ बनाना और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में ऐसा नहीं हो पा रहा। संवाद
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ग्रामीण बोले- अक्सर बंद रहता है सचिवालय
मंडी धनौरा।ग्राम पंचायत फतेहल्लापुर में बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे ग्राम पंचायत सचिवालय बंद पाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिवालय अक्सर बंद रहता है। इसके अलावा अन्य कई गांव में भी पंचायत सचिवालय रोजाना नहीं खुलने की शिकायत रहती है। संवाद
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सभी पंचायत सचिवालयों को हर रोज खोलने के निर्देश दिए गए है। जहां पंचायत सहायक को बैठकर जरूरी काम काज करना होता है। अगर सचिवालय नहीं खुल रहे हैं, तो यह घोर लापरवाही है। इसमें जरूरी कार्रवाई की जाएगी।- पारूल सिसोदिया, डीपीआरओ