आरोपी के कब्जे से बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेक बुक, लैपटॉप, स्वाइप मशीन और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। उधर, गिरोह के मुख्य सरगना समेत दो साइबर ठगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिशें दे रही है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान, असम और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है।
मूलरूप से आंध्रप्रदेश के रहने वाले वेंकट राम रेड्डी बछरायूं थानाक्षेत्र के वेव शुगर मिल में तैनात हैं। बीते दो मार्च को उनके व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से लिंक आया था। लिंक पर वेंकट राम रेड्डी ने क्लिक किया तो उनके बैंक खाते से 12.60 लाख रुपये कटकर दूसरे खातों में ट्रांसफर हो गए। मामले में वेंकट राम रेड्डी ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
साइबर इंस्पेक्टर जितेंद्र बालियान के नेतृत्व में टीम ने छानबीन की तो जिले से संचालित ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ। टीम ने बुधवार को जोया कस्बे के मोहल्ला मुल्लाना निवासी रेहान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से पांच फर्जी आधार कार्ड, चार पैन कार्ड, साइबर ठगी से संबंधित दस्तावेज, चार चेक बुक, एक पासबुक, एक लैपटॉप, तीन बैंक जमा स्लिप, स्वाइप मशीन, तीन मोबाइल फोन और आठ सिम कार्ड बरामद किए हैं। जिस खाते को रेहान चल रहा था उसमें से 12.26 लाख पीड़ित वेंकट राम रेड्डी के खाते में वापस कराए गए। पकड़ा गया रेहान श्योनाली गांव के रहने वाले आकिब के लिए काम करता है। इस गिरोह का सरगना आकिब ही है। मुरादाबाद जिले के कांठ थानाक्षेत्र के डेहरा उमरी कलां का रहने वाला एहतेशाम भी गिरोह का सक्रिय सदस्य है।
पांच सौ रुपये देकर करन के नाम पर खोला था बैंक खाता
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी गिरोह में शामिल रेहान गरीब लोगों को लालच देकर उनके नाम पर खाता संचालित कराता है। जिस खाते में चीनी मिल कर्मी वेंकट राम रेड्डी के 12.60 लाख ट्रांसफर हुए थे। वह जोया कस्बे के रहने वाले करन के नाम पर है। करन मजदूरी करता है। रेहान ने पांच सौ रुपये देकर उसके नाम पर खाता खोला था और पैन कार्ड भी बनवाया था। इस खाते में होने वाले लेनदेन से करन का कोई लेना-देना नहीं था। सिर्फ रेहान इस खाते को ऑपरेट कर रहा था। इस खाते में 15 लाख रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है।
डेहरा उमरी कलां का एहतेशाम भी गिरोह में शामिल
विवेचक जितेंद्र बालियान ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह में मुरादाबाद जिले के कांठ क्षेत्र के डेहरा उमरी कलां का निवासी एहतेशाम भी शामिल है। रेहान व एहतेशाम अपने आकिब के लिए काम करते हैं। यह दोनों गरीब लोगों के फर्जी तरीके से बैंक खाता खुलवाकर चेक बुक, पैन कार्ड और खाते में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिम कार्ड ले लेते हैं। इसके बाद नेट बैंकिंग का आईडी पासवर्ड साथियों को शेयर कर देते हैं। ठगी की घटना को अंजाम देने के बाद इन खातों में भेजे गए रुपये को रेहान व एहतेशाम आकिब के बताए खातों में कमीशन काटकर ट्रांसफर कर देते हैं।
- साइबर थाना पुलिस ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार अमरोहा के साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इनका नेटवर्क महाराष्ट्र, राजस्थान, असम और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। भागे हुए दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- अमित कुमार आनंद, एसपी