अमरोहा। मैं बूढ़ा होता जाता हूं जवां होने के खातिर...। किसी शायर के यह अल्फाज देश दुनिया में अपना नाम कमाने वाले 65 वर्षीय रामपाल सिंह पर सटीक बैठते हैं। रामपाल सिंह 23 से 27 मई तक श्रीलंका कोलंबो में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल गेम चैंपियनशिप 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके लिए वह 22 मई को श्रीलंका के लिए रवाना हो जाएंगे।
नौगांवा सादात के गांव मोहम्मादी माफी में रहकर खेती करने वाले रामपाल सिंह के परिवार में पत्नी कस्तूरी देवी के अलावा तीन बेटे कावेंद्र कुमार, सोमदेव सिंह व दीपक कुमार हैं। कावेंद्र शिक्षक, सोमदेव लिपिक और दीपक सीआइएसएफ में दरोगा हैं। घर पर रामपाल सिंह पत्नी के साथ रहते हैं और बेटे अलग-अलग शहरों में हैं। रामपाल सिंह युवावस्था से ही दौड़ लगाने के शौकीन थे। कई जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं।
फरवरी 2022 में लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में आठ मिनट 30 सेकेंड में 1500 मीटर दौड़ पूरी करके सोना जीता। इसके बाद जुलाई 2022 में बनारस में हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया और अपना ही रिकार्ड तोड़ते हुए 6.57 मिनट में 1500 मीटर की दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। सितंबर 2023 में देश की और से मलेशियन इंटरनेशनल ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 100 और 1500 मीटर दौड़ लगाई। साथ ही तीन किलोमीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था।
दोस्तों ने कर दिया प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए आवेदन
रामपाल सिंह के इस शौक को देखते हुए उनके दोस्त भयंकर सिंह और लाखन सिंह ने फरवरी 2022 में लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उनका आवेदन कर दिया था। इस बारे में उन्होंने रामपाल सिंह को बताया भी नहीं था। चयन होने के बाद दोनों रामपाल सिंह को लेकर लखनऊ पहुंच गए। लेकिन, जब वहां रामपाल सिंह का नाम अनाउंस हुआ तो वह अचंभित रह गए। बिना तैयारी के रामपाल सिंह ने आठ मिनट 30 सेकेंड में 1500 मीटर दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इसके बाद रामपाल सिंह ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक मुकाम हासिल कर आगे बढ़ते गए।
आम ग्रामीणों की जैसी दिनचर्या
किसान रामपाल सिंह बताते हैं कि उनकी दिनचर्या आम ग्रामीणों के जैसी है। वह सुबह तीन बजे उठकर करीब छह किलोमीटर दौड़ने के साथ तेज चाल चलते हैं। इसके बाद वहीं खेती के कार्य में जुट जाते हैं।