अमरोहा। सरकारी कोटे से पीजी करने के बाद निर्धारित अवधि तक सरकारी सेवा नहीं देने वाले जिले के डॉ. पीतम सिंह पर एक करोड़ रुपये की वसूली की कार्रवाई शुरू हो गई है। शासन के निर्देश पर शनिवार को सीएमओ कार्यालय से संबंधित डॉक्टर के पते पर नोटिस भेजा गया है। यदि निर्धारित समय में धनराशि जमा नहीं की गई तो राजस्व वसूली समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामला रजबपुर क्षेत्र के गांव कोटा निवासी डॉ. पीतम सिंह से जुड़ा है। सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर के अनुसार डॉ. पीतम सिंह ने सात अगस्त 2010 को रायबरेली के ऊंचाहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्साधिकारी के रूप में सेवा शुरू की थी। बाद में उन्होंने नीट पीजी-2017 के माध्यम से लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एमडी माइक्रोबायोलॉजी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।
पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दो सितंबर 2020 को विभाग में योगदान आख्या प्रस्तुत की थी। बाद में उनका तबादला गाजियाबाद के जिला एमएमजी चिकित्सालय में किया गया, लेकिन अस्पताल प्रशासन के अनुसार उन्होंने वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया और तैनाती स्थल से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार सरकारी कोटे से पीजी करने वाले चिकित्सकों को न्यूनतम 10 वर्ष तक सरकारी अस्पतालों में सेवा देना अनिवार्य होता है। इसके लिए उनसे पूर्व में बॉन्ड भी भरवाया जाता है।
यदि कोई चिकित्सक बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसे निर्धारित धनराशि सरकार को जमा करनी होती है। सीएमओ ने बताया कि इस मामले में शासन और महानिदेशालय स्तर से कार्रवाई की जा रही है। पांच जून को प्राप्त शासनादेश के आधार पर संबंधित चिकित्सक के पते पर नोटिस भेज दिया गया है। यदि डॉक्टर निर्धारित समय में एक करोड़ रुपये की राशि राजकीय कोष में जमा नहीं करते हैं तो आगे की कार्रवाई शासन स्तर से तय की जाएगी।