अमरोहा। नेपाल में हुई हिंसा का असर अमरोहा के ढोलक और डमरू के कारोबार पर पड़ने लगा है। बड़ी संख्या में अमरोहा से ढोलक व डमरू नेपाल सप्लाई होता है लेकिन हिंसा के बाद 20 घंटे में ही करीब 70 लाख रुपये के आर्डर निरस्त हुए हैं।
अचानक ऑर्डर निरस्त होने से कारोबारी परेशान है। बड़ी संख्या में तैयार माल कारोबारियों के गोदामों में रखा है। आने वाले नवरात्र तक कारोबारियों को बड़ा नुकसान होने का डर है। ऑर्डर निरस्त होने से कारोबारियों को त्योहारी सीजन से पहले निराशा हाथ लगी है।
अमरोहा के एक जिला एक उत्पाद में शामिल ढोलक की थाप की गूंज देश के कई हिस्सों के अलावा विदेशों में भी खूब सुनाई देती है। हर साल यहां से बड़ी संख्या में ढोलक और डमरू का निर्यात त्योहारी मौकों देश-विदेश को खूब किया जाता है। ढोलक कारोबारियों के लिए नेपाल भी एक बड़ा बाजार है लेकिन इस बार त्योहारी सीजन से पहले ढोलक कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है।
नेपाल हिंसा ने ढोलक निर्माता व निर्यात कारोबारियों को निराश कर दिया है। त्योहारी सीजन शुरू होने से ऐन पहले नेपाल में शुरू हुई हिंसा ने कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। नवरात्र पर करीब 70 लाख रुपये की ढोलक व डमरू निर्यात करने का ऑर्डर मिला था जिसके लिए तेजी के साथ माल को तैयार किया जा रहा था लेकिन नेपाल में हुई हिंसा के बाद ऑर्डर निरस्त होने की खबर से कारोबारियों को चिंतित कर दिया है।
जिलेभर में हैं करीब 300 इकाइयां
ढोलक अमरोहा की पहचान है। ओडीओपी में शामिल ढोलक तैयार करने की यहां करीब 300 छोटी व बड़ी इकाइयां हैं। हर त्योहारी मौके पर यहां से बड़ी संख्या में ढोलक व डमरू तैयार कर उनका निर्यात किया जाता है।
- नेपाल हिंसा का असर ढोलक कारोबार पर साफ देखा जा रहा है। हर साल यहां से बड़ी संख्या में ढोलक व डमरू नेपाल भेजे जाते रहे हैं। नवरात्र पर भी इस बार करीब 70 लाख रुपये की ढोलक व डमरू को निर्यात करने का ऑर्डर मिला था लेकिन हिंसा के बाद ऑर्डर निरस्त होने की सूचना ने निराशा दी है। आगे भी ऑर्डर मिलने की फिलहाल कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। - राजीव कुमार प्रजापति, अध्यक्ष, ढोलक हस्तकला एसोसिएशन अमरोहा
- पितृ पक्ष के बाद नवरात्र से ढोलक कारोबार थोड़ा परवान चढ़ता है। देश- विदेश में आपूर्ति के ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते है। नेपाल के लिए भी हर साल बड़ी संख्या में ढोलक व बच्चों की ढोलक और डमरू का निर्यात किया जाता है लेकिन इस बार नेपाल हिंसा ने ढोलक कारोबारियों को निराश कर दिया है। अब ऑर्डर मिलने की उम्मीद भी कम ही दिखाई दे रही है। इससे व्यापारियों में निराशा है। - दीपक अग्रवाल, अध्यक्ष, लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन