अमरोहा। जिले में गंगा को छोड़कर कागजों में बह रहीं बान, सोत और बगद नदियां पूरी तरह विलुप्त हो गई हैं। नदियों की जमीन पर जगह-जगह कब्जा कर लिए गए हैं। सालभर में एक बार प्रशासन की ओर से नदियों की खोदाई के लिए खानापूर्ति की जरूर की जाती है।
रामगंगा पोषक नहर से निकलकर अमरोहा के पानी को खुद में समेटती हुई जोया से होकर संभल के लिए निकल रही नदी की जमीन पर इमारतें खड़ी हैं। इस प्रशासन की सह कहेंगे या लापरवाही। जिले में अस्तित्व मिटा चुकी इन नदियों को दोबारा जीवित करने के लिए प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
अमरोहा जिले से गंगा नदी के अलावा सोत नदी, बान नदी और बगद नदियां निकल रही हैं। इसमें गंगा को छोड़कर तीनों नदियों का अस्तित्व मिट चुका है। शहर से होकर गुजर रही प्राचीन सोत नदी अब लगभग खत्म हो चुकी है। रामगंगा नहर से निकल कर जोया से होकर संभल जिले में पहुंच रही है लेकिन अब इस नदी पर कब्जा कर लिया गया है।
यह नदी अमरोहा शहर के पानी निकासी का सबसे बड़ा जरिया थी। फिर किसान भी इससे फसलों की सिंचाई करते थे। दूसरी नदी बान नदी है। यह नदी भी नौगांवा सादात की गंग नहर से निकल कर अमरोहा, कैलसा क्षेत्र के जंगलों से होती हुई मुरादाबाद जनपद में जाकर रामगंगा नहर में जाकर मिलती थी।
इस नदी से सैकड़ों बीघा फसल की सिंचाई होती थी। लेकिन यह नदी तो लगभग खत्म हो चुकी है। यही स्थिति गजरौला की बगद नदी की है। फैक्ट्रियों के गंदे पानी से दूषित हो चुकी यह नदी फसलों के लिए वरदान नहीं बल्कि अभिशाप साबित हो रही है। वर्ष 2010 व 2014 और 2024 में समय अफसरों ने सोत व बान नदी के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया था और मनरेगा के तहत कार्ययोजना तैयार कर खोदाई का काम शुरू कराने की पहल की थी लेकिन खानापूर्ति करके अधर में छोड़ दिया गया।