अमरोहा। जिले की सड़कों पर 60 हजार से ज्यादा ऐसे वाहन फर्राटा भर रहे हैं जिनकी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) की अवधि खत्म हो चुकी है। अधिकांश ऐसे वाहनों को जुगाड़ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन वाहनों ने निकलने वाला धुआं अमरोहा की हवा को जहरीली बना रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से इन वाहनों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है। हालांकि, कभी-कभी चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति जरूर होती है।
एआरटीओ कार्यालय में साढ़े तीन लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें चार पहिया, तीन पहिया और दो पहिया वाहन शामिल हैं। पंजीकृत वाहनों में बाइकों की संख्या सबसे अधिक 2.57 लाख है। वहीं, काराें की संख्या 30,740 है। इसके अलावा 11,767 ट्रैक्टर और 576 बस पंजीकृत हैं। इन साढ़े तीन लाख वाहनों में से 60 हजार से ज्यादा वाहन ऐसे हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं है जबकि (पीयूसी) बनाने के लिए जिले में कई प्रदूषण केंद्र संचालित हैं।
इन केंद्रों पर छह महीन से लेकर एक साल के लिए वाहनों की पीयूसी जारी की जाती है। इसके बावजूद जिले की सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन बिना पीयूसी के बेखौफ दौड़ रहे हैं जबकि नियमानुसार पीयूसी के बिना वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं है।
- चेकिंग के दौरान प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं वाहनों के चालान काटे जाते हैं। ऐसे वाहन चालकों को नोटिस भी जारी किए जाते हैं। पिछले छह महीने में ध्वनि व वायु प्रदूषण वाले 160 वाहनों के चालान किए गए हैं। - महेश शर्मा, एआरटीओ
जिले में वाहनों की स्थिति
बाइक 257123
मोपेड बाइक 4606
कार 30740
ट्रैक्टर - 11767
एंबुलेंस 312
कई प्रकार की होती हैं बीमारियां
नेत्र सर्जन डॉ. पंकज बदल ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। श्वसन संबंधी, हृदय संबंधी, त्वचा संबंधी रोगों से लेकर कैंसर तक के जोखिम शामिल हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों में निमोनिया तो बड़ों में सीओपीडी के कई मामले सामने आते हैं। वायु प्रदूषण के कारण वर्षा का जल तक दूषित हो जाता है।
जिले में 68 स्कूली वाहन अनफिट
परिवहन विभाग की लापरवाही और निजी स्कूल संचालकों की मनमानी बच्चों के जीवन के लिए खतरा बनी है। जिले में करीब 68 अनफिट वाहन हैं। इनसे स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। इन वाहनों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। उधर, सुरक्षा के लिए बसों और अन्य वाहनों में क्या इंतजाम किए गए हैं। एआरटीओ महेश शर्मा ने बताया कि अनफिट वाहन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जल्दी ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
बाइक से लेकर कार तक नो फिटनेस
बड़े काॅमर्शियल वाहनों की तो फिटनेस चेकिंग कभी-कभार की जाती है लेकिन बाइक से लेकर कार तक कोई फिटनेस चेक नहीं करता। शहर की कोई ऐसी सड़क नहीं होगी जिसमें खस्ताहाल और अवैध गैस किट लगी स्कूली वाहन न दौड़ रहे हो, लेकिन यातायात विभाग और परिवहन की ओर से सबकुछ जानते हुए भी इसे अनदेखा कर दिया जाता है। जो कई बार लोगों की जीवन पर भारी पड़ जाता है।