जिले की चारों विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए बड़े नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। मुख्यमंत्री ने जहां प्रत्येक विधानसभा में रैली कर अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया, वहीं कैबिनेट मंत्री आजम खां ने पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में जनता को लुभाने का काम किया।
एक सीट के अलावा अन्य पर मायूसी के सिवाय कुछ हाथ नहीं आया। नसीमुद्दीन सिद्दीकी, चौधरी अजित सिंह और असदुद्दीन ओवैसी भी मतदाताओं को रिझाने में ना कायमयाब रहे। सभी राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारकों ने जिले में अपने सिपहसलारों को लखनऊ तक का रास्ता तय कराने में कोई कोर सकसर नहीं छोड़ी।
सपा की बात करें तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिले की चारों विधानसभाओं में एक ही दिन जनसभा कर चारों प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाया। जनसभाओं में रिकार्डतोड़ भीड़ भी जुटी। जनता ने समर्थन का भरोसा भी दिया। सपा का दिग्गज मुस्लिम नेता आजम खां ने भी अमरोहा और नौगावां विधानसभा में सभाएं की।
इसके बाद भी अमरोहा को छोड़ वो कहीं भी जनता की भीड़ को वोटों में बदलने में कामयाब नहीं हो सके। बसपा को स्टार प्रचारकों में शामिल नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अफजाल सिद्दीकी, याकूब कुरैशी और अन्य ने भी जिले कई विधानसभाओं में जनसभाओं को संबोधित किया।
इसके बाद भी वो मुसलमानों को अपनी ओर खींचने नाकामयाब रहे। नतीजा ये रहा कि पार्टी का जिले में खाता भी नहीं खुल पाया। एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवौसी ने भी जिले में कई जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन भीड़ को वोट में तब्दील नहीं कर पाए।
रालोद प्रत्याशियों के लिए छोटे चौधरी अजित सिंह, पार्टी महासचिव जयंत चौधरी और अन्य नेताओं ने हवा बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नतीजा शून्य रहे। मोदी लहर में सभी स्टार प्रचारकों का जादू उड़न छू हो गया।