सपा छोड़कर राष्ट्रीय लोकदल का दामन थाम चुनावी रण में उतरे मौजूदा विधायक ने समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के लिए हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे, की तरह काम किया। चुनावी समीकरण बिगाड़ दिए। नतीजतन मतगणना का परिणाम जब आया तो दोनों में से कोई भी नहीं जीत सका।
तीसरी पार्टी का प्रत्याशी नौगावां सादात विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बन गया। नौगावां सादात तहसील भवन के निर्माण को लेकर जनपद में सपा के कुनबे के बीच ही रार छिड़ गई थी। मुख्यमंत्री के करीबी मौलाना जावेद आब्दी व मौजूदा विधायक अशफाक अली खां के मध्य तलवारें खिंच गई थीं।
दोनों एक दूसरे के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी कर रहे थे। उनकी ये लड़ाई मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंच गई थी। जिनके हस्तक्षेप के बाद मसला ठंडा हो गया था, लेकिन मौलाना ने विधायक की खिलाफत करना नहीं छोड़ी। जहां मौका मिला, बस निशाना साध मारा। दिलों के अंदर की ज्वाला तब और भड़क गई जब विधायक का टिकट काटकर सीएम ने आब्दी को दे दिया।
इसकी भनक लगते ही विधायक ने समाजवादी पार्टी छोड़कर राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। नौगावां सादात सीट से टिकट मिलने के बाद वह भी मौलाना के सामने प्रतिद्वंद्वी बनकर खड़े हो गए थे। यूं तो शुरू से ही लग रहा था कि उनके मैदान में उतरने से सपा का नुकसान होगा।
रालोद की जीत भी संभव नहीं है। दोनों नेताओं की लड़ाई क्षेत्र में नया गुल खिलाएगी। हर कोई मानने लगा था कि विधायक का मकसद जीतना कम, लेकिन मौलाना को हराना ज्यादा है। उनकी हार में ही विधायक की जीत होगी। हालांकि वोटर मंशा भांप भी गए थे।
उन्होंने मौलाना को जमकर लड़ाया, लेकिन थोड़ा ही सही विधायक का भी साथ दिया। नतीजतन दोनों ही नेता चुनावी दंगल में परास्त हो गए, जिसका फायदा भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चेतन चौहान ने उठाया। जीतकर क्षेत्र की विधायकी पर कब्जा कर लिया।