आज के दौर में हर घर में प्रत्येक सदस्य के पास मोबाइल फोन है, जो बच्चों के लिए ज्यादा घातक साबित होता जा रहा है। जिला संयुक्त अस्पताल के नेत्र चिकित्सक अनिल कुमार ने बताया कि युवाओं के साथ छोटे छोटे बच्चों के आंखों पर भी चश्मे लगाने के नौबत आ रही हैं। 24 घंटे में से 10 घंटे लोग मोबाइल में व्यस्त दिखते हैं। अभिभावक खुद तो मोबाइल का जमकर प्रयोग कर ही रहे हैं। साथ ही बच्चों के हाथों में भी अलग मोबाइल थमा दिए हैं, जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके कारण आंखों में रूखापन देखने को मिलता है।
आंखों की रोशनी कम होने के कारण चश्मे पहनने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिला संयुक्त अस्पताल में सप्ताह में दो दिन आंखों के चिकित्सक बैठते हैं, जो मरीजों की जांच करते हैं। दो दिन में ही करीब छह सौ मरीज अपनी आंखों की जांच कराने के लिए अस्पताल में पहुंचे हैं। नेत्र चिकित्सक के अनुसार अंधेरे में मोबाइल चलाना आंखों के लिए ज्यादा खतरनाक है, जिसके कारण 15 से 20 वर्ष के बच्चे भी आंखों से संबंधित बीमारी की चपेट में आ रहे है। यदि समय रहते मोबाइल से दूरी बना ली जाए तो वह मानसिक रूप के साथ-साथ आंखों से भी स्वस्थ रह सकेगा।
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फंगल इंफेक्शन के मरीज भी बढ़ रहे
जिला अस्पताल में रोजाना फंगल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। पहले करीब 50-60 मरीजों की ओपीडी होती थी, लेकिन अब मरीजों की संख्या बढ़कर 120 पहुंच गई है। डॉ. बाकर ने बताया कि दूषित पानी, गंदगी और साफ कपड़े न पहनने के कारण इस तरह की समस्या होती है। साफ पानी से स्नान करें और एलर्जी से बचने के लिए डॉक्टर से परामर्श कर क्रीम अवश्य लगाएं, साथ ही चिकनाई, मिठाई और मसालेदार खाने से परहेज करें, तभी फंगल इंफेक्शन की दवाई असर कर सकेगी।
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- जिस तरह मोबाइल का प्रयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ही आंखों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। आंखों को निरोगी बनाना है तो धूप में चश्मे पहनें, आंखों को समय समय पर धोएं, साथ ही सलाद अधिक खाएं और मोबाइल का अनावश्यक रूप से इस्तेमाल न करें। - डॉ. अनिल कुमार, नेत्र सर्जन