जोया (अमरोहा)। जिले की गोशालाओं में गोवंशीय पशुओं की देखभाल बेहतर ढंग से नहीं हो पा रही है। उनको मिलने वाले चारे में भी लापरवाही बरती जा रही है। डीएम की ओर से कराए निरीक्षण में जोया गोशाला में अव्यवस्थाओं की की पोल खुल गई। मामले में जोया नगर पंचायत के ईओ और गोशाला प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
11 जून को जिलेभर में संचालित गोशालाओं की पड़ताल की तो व्यवस्थाएं चौपट मिलीं थीं। विशेषकर हसनपुर, जोया और गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र में बनी गोशालाओं में गोवंशीय पशु धधकती शेड के नीचे हांफते मिले थे और सूखा भूसा ही उनके आगे पड़ा मिला था, जबकि अधिकारी गोवंश की सही देखरेख कराने का दावा करते रहते हैं। हालांकि, अधिकतर गोशालाओं में गोवंश के लिए खाने-पीने की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। पशुओं के सामने सिर्फ सूखा भूसा डाला जाता है, जो उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
चार दिन पहले गुरेठा नंदी विहार गोशाला में गोवंशीय पशुओं की मौत के बाद ट्रैक्टर से घसीटने का वीडियो सामने आया था। हालांकि, इस वीडियो को प्रशासनिक अफसरों ने पुराना बढ़कर पल्ला झाड़ लिया था, लेकिन शनिवार को डीएम निधि गुप्ता वत्स को मिली शिकायत के बाद एसडीएम शशिभूषण पाठक ने लेखपाल जितेंद्र शर्मा के साथ जोया नगर पंचायत के गोशाला का निरीक्षण किया।
गोशाला में पसरी थी गंदगी
निरीक्षण में गोवंशीय पशुओं की दुर्दशा से पर्दा उठ गया। गोशाला में गंदगी पसरी हुई थी। प्लास्टिक और पिन्नी में पशु अपना चारा तलाश रहे थे, जबकि निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में स्वच्छता, चारा और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी नगर पंचायत की होती है। लिहाजा, जोया नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी व गोशाला प्रभारी अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरती। उनकी उदासीनता भी उजागर हुई। इस तरह के मामले गोवंशीय पशुओं के प्रति लापरवाही पशु क्रूरता की श्रेणी में आते है।
- लेखपाल जितेंद्र शर्मा की तहरीर पर जोया ईओ विपिन कुमार सेंगर और गोशाला प्रभारी बृजपाल के पशुओं के खिलाफ उचित सावधानी बरतने में विपल रहने और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। - शक्ति सिंह, सीओ सिटी
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डीएम के निर्देश पर गोशाला का निरीक्षण किया गया था। गोशाला में काफी अव्यवस्थाएं मिलीं थी। जिसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी गई थी। - शशिभूषण पाठक, एसडीएम सदर