अमरोहा। बेटी से दुष्कर्म और गर्भपात कराने का आरोप लगाकर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान मां और बेटी अपने बयानों से मुकर गईं और घटना होने से इन्कार कर दिया। अदालत ने प्राथमिकी दर्ज कराने वाली मां के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं आरोपी समीर को दोषमुक्त कर दिया। प्राथमिकी दर्ज होने के करीब ढाई माह में फैसला सुनाया गया।
मामला रहरा थाना क्षेत्र के एक गांव का है। दर्ज प्राथमिकी में किशोरी की मां का आरोप था कि उसकी 17 वर्षीय बेटी साप्ताहिक बाजार जाते समय बुरावली निवासी समीर के संपर्क में आई थी। आरोप था कि समीर ने शादी का वादाकर करीब तीन साल तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। फरवरी 2026 में किशोरी गर्भवती हो गई। आरोप था कि समीर ने दवा खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया।
किशोरी की मां ने 10 जुलाई 2026 को रहरा थाने में समीर के खिलाफ दुष्कर्म, गर्भपात कराने और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद किशोरी, उसकी मां और अन्य गवाहों के बयानों व साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो प्रथम की अदालत में सुनवाई के दौरान मां अपने पूर्व आरोपों पर कायम नहीं रही। किशोरी ने भी दुष्कर्म और गर्भपात की घटना से इन्कार कर दिया। इससे अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। न्यायालय ने समीर को दोषमुक्त करते हुए मां के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार त्यागी ने बताया कि ऐसे मामलों में करीब छह महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।