समाजवादी पार्टी में विधानसभा-2017 के चुनाव से पहले दो सामानान्तर सूचियों के जारी होने से कार्यकर्ताओं में असमंजस और खलबली की स्थिति हैं, वहीं एक के बाद एक आईं दोनों सूचियां मंत्रियों और विधायकों के बारे में नई चर्चाओं और धारणाओं को जन्म दे रही हैं।
जिले के हसनपुर से विधायक और कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने जहां सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दोनों की सूचियों में स्थान पाकर पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ को दिखाया है। वहीं, मंडी धनौरा विधायक एम चंद्रा ने दोनों ही सूचियों से गायब होकर जनता के बीच अपनी निष्क्रियता की शिकायतों को और आधार दिया है।
टिकट वितरण और पार्टी के फैसलों में अपनी अनदेखी से आहत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत के एलान करते पार्टी से इतर अपने समर्थक विधायक और मंत्रियों को शामिल करते हुए प्रत्याशियों की नई सूची जारी कर दी।
मुलायम के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की दूसरी सूची ने जहां पहले घोषित प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। वहीं पार्टी के कार्यकर्ता एक प्रत्याशी के सामने उसी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार आने से हैरत में है। एक पार्टी की दो उम्मीदवारों को लेकर मतदाता भी सकते में हैं।
कैबिनेट मंत्री महबूब अली खुद के टिकट के साथ नौगावां सादात विस सीट से उनके करीबी हाजी इकरार अंसारी और धनौरा सुरक्षित सीट से उर्वशी का टिकट पाने में कामयाब रहे। पहली सूची में हसनपुर से कैबिनेटमंत्री कमाल अख्तर का नाम नहीं होने और उनका टिकट कटने की चर्चाएं तेज हुईं।
ये भी बातें होने लगी की सीएम से नजदीकी के कारण उनको भी कीमत चुकानी पड़ी।गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की ओर से सूचियां जारी हुई इन चर्चाओं ने एकदम से पलटी मार ली। मुख्यमंत्री और शिवपाल यादव की दोनों की ही सूचियों में हसनपुर से स्थान पाकर कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने सीएम और संगठन से अपनी नजदीकी को तो साबित ही किया, ये भी बता दिया कि हसनपुर सीट से उनका कोई विकल्प नहीं है।
दोनों सूची में स्थान पाने से पार्टी में उनकी मजबूत पकड़ को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। मंडी धनौरा विधायक एम चंद्रा ने दोनों ही सूचियों से गायब होकर जनता के बीच अपनी निष्क्रियता की शिकायतों को और आधार दिया है।