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Amroha News: सूखे अमृत सरोवरों में डूबे करोड़ों, सपनों ने तोड़ा दम

Thu, 23 Apr 2026 12:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। गांवों में जल संरक्षण और पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किए गए अमृत सरोवर बदहाल हो गए हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते सूखे अमृत सरोवरों में सरकार के करोड़ों रुपये डूब गए और ग्रामीणों के सपने दम तोड़ गए। जिले में कई जगह अमृत सरोवर गंदगी से अटे हैं तो कई जगह ऊंची-ऊंची घास उग आई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने और उपेक्षित तालाबों को संरक्षित कर उन्हें अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने के लिए मनरेगा के तहत व्यापक अभियान चलाया गया था। इन तालाबों पर सफाई, सुंदरीकरण, बैठने की व्यवस्था और हरियाली के लिए पौधरोपण जैसे कार्य कराए गए थे। कुछ बड़े तालाबों के किनारे बच्चों के लिए झूले लगाकर उन्हें पिकनिक स्पॉट के रूप में भी विकसित किया गया।
मंगलवार को अमरोहा तहसील क्षेत्र के अमृत सरोवर की जमीनी हकीकत देखी तो उलट नजर आई। अधिकांश अमृत सरोवरों में न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही रखरखाव पर ध्यान दिया जा रहा है। तालाबों में ऊंची-ऊंची घास ने झाड़ियों का रूप ले लिया है। पूरी तरह सूखे पड़े अमृत सरोवर में जल संरक्षण नहीं किया जा सका। राजस्व अभिलेखों के अनुसार जिले में करीब पांच हजार तालाब हैं, जिनमें से 245 को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया गया है। एक सरोवर पर कम से कम तीन लाख से लेकर दस लाख रुपये तक खर्च किए गए। इसमें बाउंड्री निर्माण, इनलेट व्यवस्था और इंटरलाकिंग जैसे कार्य शामिल हैं, जिससे गांव का पानी सरोवर तक पहुंचे और जल संचयन हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि रखरखाव और जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण अमृत सरोवर फिर से बदहाल हो गए हैं।
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पनबाड़ी तालाब पर अतिक्रमण, अमृत सरोवर योजना अधर में

अमरोहा शहर के बिजनौर सड़क स्थित पनबाड़ी तालाब का अस्तित्व धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने की योजना के तहत भूमि पूजन तो हुआ, लेकिन जीर्णोद्धार का कार्य अधूरा रह गया। इस बीच भूमाफियाओं ने तालाब की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया और अब बड़े हिस्से पर अवैध अतिक्रमण हो चुका है। प्रशासन की अनदेखी के कारण तालाब का दायरा लगातार घट रहा है, जिससे जल संरक्षण की योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


सूखे पड़े अमृत सरोवर, लाखों खर्च बेकार

कैलसा। देहात क्षेत्र की ग्राम पंचायत मंझोला खुर्द और भटपुरा सकैनिया में अमृत सरोवर पूरी तरह बदहाल हैं। पानी के अभाव में सूखे पड़े तालाब अब बच्चों के खेल के मैदान बन गए हैं, जहां हरियाली की जगह घास उग आई है। सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर बेंच और ध्वजारोहण स्थल बनाए गए, लेकिन रखरखाव के अभाव में सब बेकार साबित हो रहे हैं। इन स्थानों पर घास उग आई है। सूचना बोर्ड टूटे या गायब हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।


चार लाख की लागत से बना अमृत सरोवर बदहाल

डिडौली। जोया ब्लॉक क्षेत्र के गांव नन्हेड़ा राजपूत में वर्ष 2022-23 में करीब चार लाख रुपये की लागत से बनाया गया अमृत सरोवर आज बदहाली का शिकार बना हुआ है। जल संरक्षण और ग्रामीणों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस सरोवर में न तो पानी है और न ही नियमित साफ-सफाई की कोई व्यवस्था। सरोवर के चारों ओर गंदगी और जंगली घास उग आई है।


अमृत सरोवर के चारों ओर गंदगी के अंबार



जोया। क्षेत्र के गांव सरकड़ी अजीज में बना अमृत सरोवर पूरी तरह सूखा पड़ा है और इसके आसपास गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई महीनों से यहां न तो सफाई कराई गई और न ही किसी प्रकार की देखरेख हो रही है।



सिबौरा में अमृत सरोवर बना बंजर जमीन



जोया। ग्राम सिबौरा में अमृत सरोवर योजना प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। लाखों रुपये की लागत से बना यह तालाब पूरी तरह सूख चुका है और इसके चारों ओर ऊंची घास व झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यह बंजर जमीन जैसा दिखाई देता है। जल संरक्षण का उद्देश्य भी अधूरा रह गया है।



ऐसे कार्य सामुदायिक प्रयासों से ही कराए जाते हैं। ग्राम पंचायत भी अपनी निधि से तालाब के सौंदर्यकरण समेत दूसरे काम करा सकती है। इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है। अलग से कोई राशि जारी नहीं होती है। शासन की मंशा है कि ग्रामीणों को घूमने के लिए एक अच्छा स्थान मिले और साफ-सफाई रहे। इसमें ग्रामीणों को भी मदद करनी चाहिए। ग्राम पंचायत इन तालाबों के विकास के लिए काम कर सकती हैं। अंबरीश कुमार, पीडी
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