यूक्रेन में फंसे छात्र वहां से निकलने की जद्दोजहद में लगे हैं। जोया निवासी अंशिका, कटाई गांव निवासी अभय पंवार यूक्रेन सीमा पार कर रोमानिया पहुंच चुके हैं, जबकि नूरुल हसन अपनी दो बहनों के साथ यूक्रेन में पश्चिम दिशा के सुरक्षित शहर के लिए निकल गए हैं। यहां से वह हंगरी सीमा के लिए निकलेंगे।
वहीं कीव यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में फंसे नौगांवा निवासी मोहम्मद शारिक भी अपने दोस्तों के साथ स्टेशन पहुंचे और यहां से ट्रेन में सवार होकर सुरक्षित स्थान के लिए रवाना हुए। यूक्रेन सीमा पार करने वाले अभय और अंशिका ने रोमानिया पहुंचकर राहत की सांस ली और भगवान का शुक्रिया अदा किया। साथ ही बाकी साथियों के सुरक्षित आने के लिए प्रार्थना की।
सोमवार को कीव शहर में कर्फ्यू हटते ही छात्र सुरक्षित स्थानों की तरफ निकल पड़े हैं। जोया निवासी नुरुल हसन अपनी बहन कमर जहां और उमर जहां समेत दस छात्रों के साथ ट्रेन में सवार होकर पश्चिम क्षेत्र स्थित सुरक्षित शहर के लिए निकल गए है। यहां से वह हंगरी सीमा के लिए निकलेंगे। वहीं डिडौली के कटाई गांव निवासी अभय पवार ने बताया कि उन्होंने मुरादाबाद के रहने वाले दो साथियों के साथ यूक्रेन सीमा पार कर लिया है। रोमानिया में एंट्री करने के बाद यहां करीब तीन हजार से अधिक छात्रों की भीड़ जुटी हुई है। फिलहाल यहां से एयरपोर्ट जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था नहीं हो पा रही है, लेकिन रोमानिया में छात्रों को खाने-पीने और रहने के लिए अच्छी व्यवस्था है।
रविवार की सुबह गाजियाबाद और नोएडा निवासी दो दोस्तों से साथ यूक्रेन सीमा पार कर रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचीं अंशिका को फ्लाइट का इंतजार है। उन्होंने बताया कि उन्हें एयरपोर्ट के पास कैंप में रखा गया है। जहां करीब 80 से 100 छात्र हैं। रविवार से फ्लाइट नहीं मिल सकी है। सोमवार शाम तक फ्लाइट मिल सकती है, लेकिन यहां छात्रों के लिए अच्छी व्यवस्था की गई है। खाने-पीने की मुकम्मल व्यवस्था है। उठने बैठने के लिए भी अच्छी तैयारी गई है। किसी तरह यूक्रेन में फंसे अन्य साथी छात्र सुरक्षित आ जाएं।
वहीं अमरोहा नगर के रहने वाले शाह आलम हंगरी सीमा से दो किलोमीटर पहले वीन्नित्स्या यूनिवर्सिटी के एक हॉस्टल में रुके हुए हैं। उनके पिता डॉ. जमशेद कमाल ने बताया कि सोमवार को वहां नेटवर्क की दिक्कत हो रही है। इस कारण बात नहीं हो पा रही है। फिलहाल वह हंगरी सीमा के पास हॉस्टल में रुके हुए हैं।