अमरोहा। कागजों में तालाब दिखाकर एक लाख से अधिक रुपये निकालने के मामले में जिलाधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने उपजिलाधिकारी हसनपुर को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट कहा कि किसान की जमीन में तालाब कैसे खोद दिया गया। प्रकरण गंभीर है, इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। एसडीएम मौके पर देखेंगे कि तालाब कब खोदा गया है। वह जमीन किसकी है। वहीं, जमीन जाने और फसल बर्बाद होने के गम में किसान बेबस और लाचारी के आंसू बहा रहा है। कोई उसकी पीड़ा सुनने वाला नहीं है।
गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र के सांथलपुर गांव में मनरेगा योजना के अंतर्गत 7 से 20 मार्च तक किसान विशुपाल पुत्र अंतराम के गाटा संख्या 669 नंबर के करीब छह बीघा जमीन में तालाब दिखकर 1,1,920 रूपये निकालने का खुलासा हुआ था। जिस खेत में तालाब दिखा गया, उस भूमि में बाजरे की फसल खड़ी थी। तालाब की खुदाई में 80 मजदूरों की 560 हाजिरी दर्शाकर रुपये निकाले गए थे। सात महीने तक यह फर्जीवाड़ा विभागीय दस्तावेजों में छिपा रहा। लेकिन अमर उजाला ने बारह अक्टूबर को इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया तो अफसरों में हड़कंप मचा गया।
यह भ्रष्टाचार ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के बीच हुआ था। चार दिन तक फर्जीवाड़े में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारी चुप्पी साध कर बैठे रहे। लेकिन, शुक्रवार को कागजी तालाब को हकीकत बनाने के लिए सरकारी दबंगई दिखाई। भ्रष्टाचार में संलिप्त लोग चार गांव के सैकड़ों मजदूर लेकर खेत पर पहुंच गए और किसान की फसल उजाड़कर तालाब की खुदाई कर दी। खुदाई शुरू करने से पहले जंगल में गिरोहबंदी की गई। खेत के चारों तरफ लाठी-डंडों से लैस गुर्गे तैनात दिखाई दिए। उन्होंने खेत पर पहुंचने वाले लोगों को दौड़ा दिया। यहां बेबस और लाचार किसान गिड़गिड़ता रहा, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा था। अब शनिवार को डीएम उमेश मिश्र ने कड़ा संज्ञान लिया है। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि कैसे किसी की निजी जमीन में तालाब खोद दिया गया। प्रकरण गंभीर है, इसकी जांच होगी। उन्होंने उपजिलाधिकारी हसनपुर विजय शंकर को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं।