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आम के डंठल पर ‘जूं’ का हमला, पैदावार पर संकट

Mon, 02 May 2016 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अमरोहा
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कच्चा ही तोड़कर लाया गया हैदराबादी आम - फोटो : amar ujala
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आम के पेड़ों में एक कीड़ा लगने लगा है। आम उत्पादक इसे जूं बता रहे हैं। यह कीड़ा डंठल को अंदर ही अंदर  काटता रहता है और हल्की हवा चलने पर अमिया पेड़ से टूटकर गिर जाती है। इसी कारण आए दिन अमिया के ढेर लग रहे हैं। हालांकि  इसकी रोकथाम के लिए पेड़ों पर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। 
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इस साल आम की फसल अच्छी होने की उम्मीद है, लेकिन पहले तो आंधी और बरसात से आम की फसल को नुकसान हुआ। अब जूं  पेड़ों में लगने लगा है, चैंपा भी किसानों को परेशान किए हुए है। सबसे ज्यादा नुकसान जूं ही पहुंचा रहा है, जिसकी वजह से छोटी-छोटी अमिया पेड़ से टूटकर गिर जा रहीं हैं। आम बड़ा न होने से उत्पादकों को नुकसान हो रहा है।

आम व्यापारी ब्रह्मपाल का कहना है कि इन दिनों आम के पेड़ों में जूं लग गया है। यह आम के डंठल को कमजोर कर देता है। जिससे हल्की हवा चलने पर भी आम गिर जाता है। इसके अलावा चैंपा भी आम को नुकसान पहुंचा रहा है। शाहिद और आरिफ कहते हैं कि शनिवार को मंडी में करीब पच्चीस क्विंटल अमिया आईं। छोटा होने से इसका सही दाम नहीं मिला।
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फिलहाल इसे दिल्ली भेजा जा रहा है। करीब पैंतीस किलो आम 70-80 रुपये  में बेंचना पड़ रहा है, जबकि आम की कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो होना चाहिए। दवा का छिड़काव भी तीन दिन तक ही लाभ पहुंचाता है, फिर कीड़ा सक्रिय हो जाता है। दयाचंद और अनीश का कहना है कि दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन  इससे भी कोई खास लाभ नहीं मिल रहा। 

क्या कहते हैं बागान विशेषज्ञ
सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व निदेशक डा. ओपी सिंह का कहना है कि अमरोहा में आम के बगीचों का सर्वे कराया गया था। वहां जो कीट हैं उससे निपटने के लिए पेड़ के खोखले स्थान पर मिट्टी के तेल का फावा भर दें। इससे कीड़े मर जाएंगे। यदि कीड़े का इंतजाम नहीं किया तो पेड़ सूख जाएगा। इसके लिए पेड़ के नीचे खुदाई करके आर्गेनिक ट्रीटमेंट बोबारिया बेदियाना के जरिए भी कीट को खत्म किया जा सकता है। मिट्टी के तेल का उपाय सबसे अच्छा है क्योंकि इससे आम के फल पर कोई असर नहीं होता है। 

पेड़ों की दूरी बढ़ाएं 
कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डा. ओपी सिंह का कहना है कि कई साल पहले मेरठ से एक विशेषज्ञों का दल भेजकर अमरोहा में बगीचों का सर्वे कराया था। जिसमें सबसे बड़ी समस्या आम के पेड़ों के बीच कम दूरी रखने की थी। कम से कम 10 से 12 मीटर की दूरी पर एक पेड़ होना चाहिए। लेकिन यहां आठ मीटर या इससे भी कम दूरी पर पेड़ हैं। अधिक दूरी होने से आम के पेड़ में बीमारियां नहीं फैलती हैं। दूरी अधिक रखकर बगीचे में हल्दी की पैदावार भी की जा सकती है, इससे आम को कीड़ों से बचाया जा सकता है। 
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