अमरोहा। 13 साल पहले युवक की गोली मारकर हत्या करने वाले दोषी को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने दो लोगों को दोष मुक्त कर दिया है। सैदनगली के फतेहपुर देव गांव में किसान अब्दुल अजीज का परिवार रहता है। उनका बेटा इमरान बिहार में नौकरी करता था। अगस्त 2013 में ईद के मौके पर इमरान घर आया हुआ था। 10 अगस्त 2013 को ईद वाले दिन गांव का ही रहने वाला रिफाकत इमरान को घर से बुलाकर अपने साथ ले गया।
13 अगस्त 2013 को क्षेत्र के मन्नीखेड़ा गांव स्थित गन्ने के खेत में इमरान का शव बरामद हुआ। इमरान की गोली मारकर हत्या की गई थी। इस मामले में मन्नीखेड़ा गांव के चौकीदार ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। जानकारी मिलने पर 18 अगस्त 2013 को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजनों ने इमरान की पहचान कर गांव के रहने वाले रिफाकत पर घर से लेजाकर हत्या करने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने रिफाकत और असमोली थानाक्षेत्र के गांव सबीरनपुर के रहने वाले रिफाकत के ममेरे भाई गुलाम और उसके दोस्त कासिम को नामजद किया।
पुलिस ने रिफाकत की निशानदेही पर 12 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस बरामद किया था। बाद में पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल तीनों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय नसीमा खानम की अदालत में चल रही थी।
शनिवार को न्यायालय ने रिफाकत को दोषी करार दिया। जबकि साक्ष्यों के अभाव में आरोपी गुलाम और कासिम को दोष मुक्त कर दिया है। एडीजीसी देवेश नागर ने बताया कि हत्यारोपी रिफाकत को शक था कि इमरान का उसकी भाभी से संबंध है। इसी शक के चलते रिफाकत के भाई ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था और इसी शक की रंजिश में इमरान की हत्या की गई थी। संवाद