आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुए की बढ़ती संख्या चिंताजनक बनी हुई है। गांव-गांव तेंदुए की दहशत है। लोगों को जान का खतरा बना हुआ है। तेंदुए न सिर्फ खेत पर काम करने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं। बल्कि, घरों व जंगल में घूमने वाले जानवरों को शिकार बना रहे हैं।
पिछले तीन सालों में पांच से ज्यादा तेंदुओं को रेस्क्यू करके जंगल में छोड़ा जा चुका है। दस से अधिक शावक भी मिले हैं। जबकि, आपसी लड़ाई व ग्रामीणों के हमले में तीन तेंदुओं की मौत हो चुकी है। डीएफओ के मुताबिक जिले में 20 तेंदुए हैं।
जनपद में वन विभाग के पास तेंदुआ पकड़ने के लिए पिंजरा तो है, लेकिन ड्रोन कैमरे, ट्रेडिंग डिवाइस और प्रशिक्षित टीमों को जरूरत पड़ने पर बाहर से बुलाया जाता है। यही वजह है कि तेंदुआ वन विभाग की पकड़ में नहीं आता है। पिछले कुछ दिन से मंडी धनौरा व नौगांवा क्षेत्र में लगातार तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। अब नौगांवा क्षेत्र के दारुद सराय गांव के पास भट्ठे पर तेंदुआ देखा गया है। क्षेत्र के ही अलीपुर कलां गांव में भी तेंदुआ ने कुत्ते का शिकार बना लिया है।
इससे पहले भी तेंदुए कई लोगों पर हमला कर घायल कर चुके हैं। करीब एक महीने पहले तेंदुए ने जिले के गांव देहरा कादर बक्श में ग्रामीण केसरी सिंह पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। गांव महमदी में भी मादा तेंदुआ को उसके शावक के साथ वन विभाग ने बेहोश कर पकड़ी थी। तेंदुए के आतंक से ग्रामीण अपने खेतों पर जाने में सतर्कता बरत रहे हैं।
- तेंदुओं की संख्या जिलेभर में करीब 20 है। आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ेगी। इसलिए लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। लोगों से तेंदुआ होने की जानकारी मिलते ही टीम को मौके पर भेजा जाता है। पिंजरा भी लगाया जाता है। पिछले दिनों में कई तेंदुए पकड़े भी गए हैं। - एसपी सिंह, डीएफओ