धरने पर बैठे वकीलों ने तहसील के चकबंदी और राजस्व न्यायालयों व कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की निंदा की। उन्होंने बढ़ते भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कर्मचारियों की लापरवाही पर गहरा रोष व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने चिंता जताई कि बार-बार शिकायतें करने और अधिकारियों से वार्तालाप करने के बावजूद समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल रहा है।
वकीलों ने मांगों से संबंधित ज्ञापन सीएम, राजस्व परिषद, मंडल आयुक्त, डीएम और राजस्व मंत्री को भी भेजा। अध्यक्ष चंद्र सैन अग्रवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार और अनियमितता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वकीलों ने नायब तहसीलदार के व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए उसकी आलोचना की और चेतावनी दी कि कोई भी नई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी।
महासचिव मदन कुमार ने चकबंदी के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पूर्व अध्यक्ष मुजाहिद चौधरी ने एसडीएम से एसीओ चकबंदी के पेशकार अक्षय पंवार से वादकारियों के पैसे वापस दिलाने और उनके लंबित नामांतरण कराने का भी अनुरोध किया।
एसडीएम हसनपुर पुष्कर नाथ चौधरी ने धरना स्थल पर पहुंचकर वकीलों का ज्ञापन लिया। धरने की अध्यक्षता अध्यक्ष चंद्र सैन अग्रवाल ने की, जबकि संचालन मुजाहिद चौधरी और मदन कुमार खड़गवंशी ने संयुक्त रूप से किया। यहां पूर्व अध्यक्ष गंगा सरन खड़गवंशी, महीपाल सिंह, हरिओम शर्मा, सुबोध शर्मा, सुनील भटनागर, आफताब आलम, गजेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह रहे।