गजरौला में इंदिरा चौक पर बैरीकेडिंग तोड़कर अतरासी की ओर जाते किसान।
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गजरौला(अमरोहा)। कृषि कानूनों के विरोध में आहूत भारत बंद के तहत अतरासी जा रहे भाकियू (टिकैत) के किसानों को पुलिस-प्रशासन ने रोक दिया। इससे गुस्साए किसान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी विजयपाल सिंह के नेतृत्व में इंदिरा चौक (बदायूं-बिल्सी स्टेट हाईवे) पर धरना देकर बैठ गए। 45 मिनट बाद वे यहां से उठकर अतरासी की ओर कूच कर गए। इस दौरान उनकी पुलिस-प्रशासन से तीखी नोकझोंक भी हुई। वहीं वाहनों के पहिए थमे रहे।
मंगलवार को किसान संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया था। वहीं भाकियू से जुड़े किसानों ने हाईवे पर स्थित अतरासी चौराहे पर धरना-प्रदर्शन की रणनीति बनाई थी। इसको देखते हुए यहां भी पुलिस ने किसानों को रोकने की व्यवस्था की हुई थी। कुमराला पुलिस चौकी पर अवरोधक लगाए गए थे। एसडीएम विवेक यादव, सीओ सत्येंद्र सिंह और इंस्पेक्टर आरपी शर्मा फोर्स लेकर मुस्तैद थे। पूर्वान्ह साढ़े 11 बजे मंडी धनौरा की ओर से भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी विजयपाल सिंह के नेतृत्व में आ रहे किसानों को पुलिस ने कुमराला चौकी पर रोक दिया। वहां काफी नोकझोंक हुई। इसके बाद किसान वहां से आ गए। इंदिरा चौक पर मौजूद एसडीएम और सीओ ने उन्हें अतरासी जाने से रोक दिया। दोपहर 12 बजे किसान वहीं धरना देकर बैठ गए। सपा की कार्यकारिणी सदस्य जितांबर यादव, विपिन कौशिक, नगर अध्यक्ष सचिन यादव भी किसानों के समर्थन में आ गए। यहां चौधरी विजयपाल सिंह ने कहा कि पुलिस-प्रशासन सरकार की कठपुतली बनकर काम कर रहा है। किसान अपना अधिकारी लेकर ही रहेंगे। 12 बजकर 45 मिनट पर उन्हें आगे जाने को कह दिया गया। इस पर उत्साहित किसान बैरीकेडिंग और अवरोधक हटाते हुए अतरासी की ओर कूच कर गए।
अधिकारी नहीं रोकते तो नहीं लगता जाम
गजरौला। भाकियू (टिकैत) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी विजयपाल सिंह के नेतृत्व में अतरासी जा रहे किसानों का गजरौला में रुकने अथवा स्टेट हाईवे पर जाम लगाने का कोई कार्यक्रम नहीं था। वे तो शांतिपूर्वक तरीके से नारेबाजी करते हुए यहां से गुजर रहे थे लेकिन इंदिरा चौक पर मौजूद सीओ सत्येंद्र सिंह ने उन्हें रोक लिया और आगे नहीं जाने दिया। इस पर किसान यहीं स्टेट हाईवे पर दरी बिछाकर धरना देकर बैठ गए। वहीं किसानों के धरने पर बैठते ही खाकी के भी हाथ-पांव फूल गए। उधर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के गजरौला में ही रुके होने के कारण अतरासी में आंदोलित किसान कोई निर्णय नहीं ले पा रहे थे। बताते हैं कि दोपहर ठीक पौने बारह बजे एक शीर्ष अधिकारी का फोन सीओ सत्येंद्र सिंह के पास आया। इसके तुरंत बाद किसानों को यहां से अतरासी जाने को कह दिया गया।