अमरोहा। घर में घुसकर तमंचे के बल पर किशोरी से दुष्कर्म के दोषी बाल अपचारी को न्यायालय ने 20 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। फैसला सुनाए जाने के वक्त दोषी जमानत पर बाहर था, जिसे अदालत के आदेश के बाद तुरंत हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला सैदनगली थानाक्षेत्र के एक गांव का है। 30 जून 2023 की रात किसान और उनकी पत्नी अपने खेत पर फसल की सिंचाई करने के लिए गए हुए थे। इस दौरान उनकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। इसी बात का फायदा उठाकर गांव का ही रहने वाला बाल अपचारी चुपके से घर में घुस आया। उसने नाबालिग किशोरी को तमंचा दिखाकर डराया-धमकाया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
देर रात जब किशोरी के माता-पिता खेत से वापस लौटे, तो पीड़िता ने रोते हुए अपने साथ हुई पूरी आपबीती बताई। इसके बाद किसान ने तुरंत सैदनगली थाने पहुंचकर तहरीर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल अपचारी के खिलाफ घर में घुसकर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की। बाद में पुलिस ने आरोपी बाल अपचारी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
बाद में जांच पूरी कर पुलिस ने न्यायालय में आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट प्रथम की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने प्रभावी ढंग से पैरवी की और अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। मंगलवार को मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए न्यायालय ने प्रस्तुत गवाहों और सबूतों के आधार पर बाल अपचारी को दोषी माना। अदालत ने उसे 20 साल के कारावास की सजा सुनाई और 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
जमानत पर छूटने के बाद फिर किशोरी को ले गया बाल अपचरी
वरिष्ठ लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने बताया कि दुष्कर्म के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद भी बाल अपचारी नहीं सुधरा। आरोप है कि उसने दोबारा किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और वह गर्भवती हो गई। इस मामले में भी सैदनगली थाने में आरोपी के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस इस प्रकरण की भी विवेचना कर रही है।
एफएसएल रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य
वरिष्ठ लोक अभियोजक ने बताया कि मामले में एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) रिपोर्ट अभियोजन पक्ष के लिए सबसे अहम साक्ष्य साबित हुई। रिपोर्ट में पीड़िता के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिससे अदालत में आरोप सिद्ध करने में मदद मिली। सुनवाई के दौरान चिकित्सक, विवेचक और पीड़िता सहित कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके अलावा पुलिस की सुदृढ़ विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बाल अपचारी को दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई।