अमरोहा। सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में लापरवाही बरतने के मामले में एसपी ने दरोगा मुजम्मिल को लाइन हाजिर कर दिया है। उसके ऊपर मुकदमे में गैंगरेप पॉक्सो और एससीएसटी की धारा बढ़ाने के बाद भी जांच सीओ को नहीं सौंपने का आरोप है। पूरे मामले में दरोगा की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अगर मुकदमा लिखे जाने से नेहा हत्याकांड के बीच आरोपी अंकित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया होता तो शायद नेहा चौधरी की हत्या न हुई होती।
मालूम रहे कि डिडौली कोतवाली के एक गांव निवासी किसान ने 18 जनवरी आरोपी अंकित चौधरी और उसके ममेरे भाई अक्षय के खिलाफ एफआईआर दर्ज किशोरी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। इस दौरान आरोपी किशोरी को जोया में छोड़कर फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने किशोरी के बयान न्यायालय में दर्ज कराए। विवेचक दरोगा ने 29 जनवरी को मुकदमे में सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी एसटी एक्ट की धाराओं की बढ़ोतरी की थी। चूंकि एससीएसटी एक्ट की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी के द्वारा की जाती है, बावजूद इसके दरोगा ने 8 फरवरी तक मुकदमे से संबंधित पर्चे सीओ को नहीं सौंपे थे। इसी बीच सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपी अंकित चौधरी ने अपनी सगी बहन नेहा चौधरी की हत्या कर दी थी। हैरत की बात यह है कि किशोरी के अपहरण से लेकर नेहा हत्याकांड के बीच 20 दिन तक पुलिस आरोपी अंकित चौधरी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। अगर पुलिस उसे जेल भेज देती, तो संभवत नेहा चौधरी आज जिंदा होती।
एएसपी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में एससीएसटी एक्ट की धाराओं की बढ़ोतरी करने के बाद भी सीओ को पर्चे ने सौंपना दरोगा की बड़ी लापरवाही है, इसलिए उन्हें लाइन हाजिर किया गया है।