सूख चुकी बान नदी का अस्तित्व बचाने के लिए अब किसी भगीरथ की जरूरत है। इसके लिए प्रशासन ने कवायद तो शुरू कर दी है, मगर अब जब उसके अभिलेख खोजे जा रहे हैं तो कई गांवों के अभिलेखों से बान नदी गायब ही दिखाई दे रही है, जबकि कई गांवों में जहां नदी दर्ज है वहां फसलें खड़ी हैं।
अब ऐसा कैसे संभव है कि कोई नदी किसी गांव में हो और किसी में न हो, जबकि गांवों के बुजुर्ग दबी आवाज में अतिक्रमण की बात स्वीकार करते हैं। इससे बान की भूमि पर अतिक्रमण के बाद अभिलेखों में भी हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है, जो तहसीलकर्मियों और अफसरों की मिलीभगत के बिना असंभव है। हालांकि अफसर मंगलवार से नदी की खुदाई का दावा कर रहे हैं।
अमर उजाला ने बान नदी का अस्तित्व बचाने को मुहिम चलाई है। उजाला की मुहिम पर प्रशासन बान नदी की खुुदाई को आगे आया है। डीएम ने 31 मई से बान नदी की खुदाई का कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिए थे।
वहीं बाढ़ खंड विभाग को दो दिन में एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए थे। लेकिन डीएम के आदेश के चार दिन बाद भी बाढ़ खंड विभाग एस्टीमेट तैयार नहीं कर पाया है। इससें तकनीकी कमी सामने आई हैं। जनपद के कई गांवों में बान नदी अभिलेखों में दर्ज नहीं है। जहां नदी दर्ज हैं वहां वर्तमान में फसलें खड़ी हुए हैं। नदी क्षेत्र पर अतिक्रमण है। पूर्व में नदी कहा बनती थी, बाद में नदी बहते हुए किन क्षेत्रों में बढ़ गई। यह भी दर्ज नहीं है। तो कहीं रेत के ऊंचे, ऊचे टीले हैं।
प्रशासन द्वारा नदी की नापजोख में यह सब सामने आया है। इसी लिए अभी तक एस्टीमेट तैयार नहीं हो पाया है। उधर, तहसील प्रशासन का कहना है कि बान नदी की खुदाई को नक्शे खंगाले जा रहे हैं। पूर्व में नदी जिन क्षेत्रों में बहती थी, इसके रिकार्ड खंगाले जा रहे है। जांच पड़ताल की जा रही है।ा हर हाल में बान नदी की खुदाई का कार्य जल्द से जल्द प्रारंभ कर दिया जाएगा।