सूबे में अवैध खनन को लेकर गंभीर हुए हाईकोर्ट ने जहां सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए हैं, वहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मचा दी है। ऐसा होना भी लाजमी है, क्योंकि सीबीआई जांच हुई तो उनकी गर्दन फंसेगी। साथ ही कई माननीय भी लपेटे में आएंगे। जनपद में अफसर, माननीय व माफिया का गठजोड़ बना है, जिसको केवल केंद्रीय ब्यूरो एजेंसी ही तोड़ सकती है। चेहरे बेनकाब कर सकती है। फिलहाल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रत्येक की धड़कनें बढ़ी हैं।
जनपद में अंधाधुंध अवैध खनन हो रहा है। खेतों को खोदकर जहां खाई बना दी गई हैं, वहीं झीलें भी गहरी कर दी हैं। खेतों को खरीदकर जहां खनन माफिया धरती की कोख को उजाड़ रहे हैं, वहीं बान ही नहीं बल्कि गंगा नदी को भी नहीं छोड़ रहे हैं। झीलों को मानों खाई बना दिया है। दबाव अधिक होने पर एकाध जगह प्रशासनिक अधिकारी छापेमारी कर शांत हो जाते हैं। शायद ही कोई ऐसा अधिकारी हो, जिसे खनन की जानकारी न हो। लेखपाल से लेकर डीएम तक भलीभांति परिचित हैं। सिपाही से लेकर एसपी तक जानते हैं।
खनन माफिया के अवैध कारोबार की इस लीला में माननीय भी संलिप्त हैं। एक ट्राली को छुड़वाने के लिए एड़ी चोटी तक के जोर माननीय लगा देते हैं। न छोड़ने पर तबादला कराने की धमकी देते हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, उससे अधिकारी ही नहीं बल्कि माफिया व माननीय भी बेचैन हो गए हैं। तीनों के रहमोकरम पर ही धंधा चलता था, किंतु अब इस पर सीबीआई की नजर होगी। अगर कभी जनपद में सीबीआई जांच के लिए आई तो पूरा खेल खुलकर सामने आ जाएगा। सीबीआई की चर्चा मात्र से ही हरेक अधिकारी व माफिया में हड़कंप मचा है।