अमरोहा। नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन की याद में मनकबती महफिल का आयोजन किया गया। इस दौरान शायरों ने बेहतरीन कलाम पेश कर कर्बला में दी गई कुर्बानी का जिक्र किया। साथ ही खूब वाहवाही लूटी।
रविवार की रात शहर के मोहल्ला सराय कोहना में तंजीम हुसैन जैदी के आवास पर महफिल की शुरुआत तिलावते कलाम-ए-पाक से की गई। इस दौरान प्रो. नाशिर नकवी ने कहा...नूरे वहदत जानिसारों में जगमंगाएंगे हुसैन, जब चराग-ए-आजमाइश को बुझाएंगे हुसैन। इस्लाम आलमी एडवोकेट यूं नमूदार हुए...हुसैन कौन हैं ये तो कोई सवाल नहीं, हुसैन जो हैं उनकी कोई मिसाल नहीं। नाजिश मुस्तफा ने कहा...दावा तेरा फिजूल है इश्क-ए-हुसैन का, किरदार में नही है जो सीरत हुसैन की। सैय्यद शीबान कादरी ने अकीदत को यूं पिरोया...प्यासों के सामने रहा दरिया फरात का, और फासला ये ही कोई दो चार हाथ का।
जुबैर इब्ने सैफी ने फरमाया...पजीराई हुई दुनिया में उसकी, चला जब दीन सजकर कर्बला से, डाॅ. नासिर अमरोहवी ने पढ़ा...गमे हुसैन से लबरेज दिल खुदा की कसम, बरोज-ए-हश्र मसर्रत से मुस्कुराएंगे। इसके अलावा अनीस अहमद , हाफिज शमीम अमरोहवी, ताजदार मुज्तबा, जैद जैदी व आबान जैदी ने भी कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
महफिल की अध्यक्षता महबूब हुसैन जैदी व संचालन सैय्यद शीबान कादरी ने किया। इस दौरान मुराद अली खां, मोहम्मद अहमद जैदी , इकरार जैदी, महताब हुसैन , हुमायूं जैदी, तंजील हामिद, आसिम जैदी, इकराम जैदी, नाज अख्तर आदि मौजूद रहे।