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Amroha News: हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं भारतीय संस्कृति की अभिव्यक्ति है

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मंडी धनौरा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। संघ साहित्य और राष्ट्र भाषा विषय पर आयोजित गोष्ठी में राष्ट्रवादी लेखक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, परंपरा व सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति है। परिषद की ओर से इस मौके पर उनको सम्मानित भी किया गया।
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गोलघर के पास आयोजित गोष्ठी में अशोक कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी ने राष्ट्रीय एकता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान डिजिटल के दौर में भी हिंदी तेजी से अपनी वैश्विक पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सिनेमा व साहित्यिक मंचों पर हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता इसका प्रमाण है। गोष्ठी में संघ के सामाजिक सद्भावना परियोजना के संगठन मंत्री रमेश चंद ने कहा ेकि भक्तिकाल से आधुनिक युग तक हिंदी साहित्य ने समाज को दिशा देने के साथ साहित्य को सौंदर्य व संवेदनशीलता प्रदान की।
परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. यतींद्र कटारिया ने कहा कि हिंदी देश की सांस्कृतिक पहचान है। संघ ने अपनी सौ साल की यात्रा में हिंदी माध्यम को जन जन तक पहुंचाया है। इस मौके पर परिषद के नगर अध्यक्ष राजेंद्र सैनी, प्रशांक त्यागी, चंद्रजीत यादव, अखिलेश भाटी आदि मौजूद थे।
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