अमरोहा। हेपेटाइटिस के मरीजों की जांच की सुविधा मुकम्मल तरीके से जल्द शुरू हो जाएगी। प्राथमिक तौर पर अमरोहा में कराई गई हेपेटाइटिस के छह मरीजों की जांच की रिपोर्ट लखनऊ से मिलान हो गई है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अमरोहा व लखनऊ में हुई जांच की रिपोर्ट एक है जिससे स्वास्थ्य विभाग में स्पष्ट कर दिया है कि अमरोहा में भी हेपेटाइटिस की जांच हो सकेंगी।
अब अमरोहा स्वास्थ्य विभाग में लैब में इस्तेमाल होने वाले केमिकल किट व अन्य मशीनों का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज दिया है। सामान के मिलते ही जांच से शुरू कर दी जाएंगी।
जिले में हेपेटाइटिस के 12 हजार से ज्यादा मरीज हैं जबकि लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीमारी से संबंधित लक्षण वाले करीब 15 से 20 मरीज रोजाना जांच कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन जिला अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल मेरठ या दिल्ली लैब भेजने पड़ रहे हैं। हालात यह है कि यहां से रिपोर्ट मिलने में करीब 45 से 50 दिन का समय लग रहा है। इस कारण मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ब्लड बैंक प्रभारी प्रमोद कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी लीवर से संबंधित एक वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लीवर को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुंचता है। अनदेखी पर लीवर फेलियर या कैंसर तक की नौबत आ जाती है, फिर मरीज की जान पर बन आती है। यह बीमारी इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। क्योंकि आधे से ज्यादा संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी भी है।
ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते हैं या फिर सामने आने में ही दस साल तक लग जाते हैं। इसलिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त की जांच कराने का सुझाव देते हैं। आरटीपीसीआर लैब में ट्रायल के रूप में हेपेटाइटिस के छह मरीजों की जांच की गई थी। इसके बाद उन्हीं मरीजों के सैंपल लेकर लखनऊ जांच के लिए भेजे गए। जहां दोनों की रिपोर्ट एक जैसी आई है। जिला अस्पताल में तैयार हो रही इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री लैब में हेपेटाइटिस जांच हुआ करेंगी।
ऐसे फैलता है संक्रमण
हेपेटाइटिस-सी का संक्रमण तब फैलता है जब वायरस खून को संक्रमित कर फैलना शुरू कर देता है। इस वायरस के सात रूप हैं और सातों के 67 प्रकार हैं। मरीज को कौन सी दवा देनी है या इलाज का तरीका क्या होगा। यह वायरस के रूप पर निर्भर करता है। जिला अस्पताल में अब दवाएं मौजूद हैं।
यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है तो उन्हें बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए। चिकित्सक के मुताबिक उसके कपड़े, टूथ ब्रुश, बर्तन को अलग कर देना चाहिए। पिछले दिनों आरटीपीसीआर लैब में ट्रायल के रूप में हेपेटाइटिस के छह मरीजों की जांच की गई थी। इसके बाद उन्हीं मरीजों के सैंपल लेकर लखनऊ जांच के लिए भेजे गए। जहां दोनों की रिपोर्ट एक जैसी आई है। जिला अस्पताल में तैयार हो रही इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री लैब में हेपेटाइटिस जांच हुआ करेंगी। -डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ