रिश्ता टूटते ही एक बेटी दिल से भी टूट गई। दहेज में गाड़ी की खातिर लड़के पक्ष द्वारा तोड़े गए रिश्ते ने उसको इस कदर झकझोर दिया कि समाज में जीने से अच्छा मरने का फैसला कर लिया। परिजनों की नजर बचते ही कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दहेजलोभियों को सबक सिखाने की बजाय माता-पिता भी खामोश हो गए। दिल पर पत्थर रखकर लाश का अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि पुलिस घटना से पूरी तरह अनभिज्ञ रही।
देहात थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी किसान ने अपनी बेटी का रिश्ता हसनपुर क्षेत्र के रहने वाले युवक से तय किया था। चूंकि युवक सरकारी नौकर था, इसलिए परिवार के लोगों की डिमांड भी ऐसी ही थी। युवती बीए पास थी। इसलिए पिता ने भी उसकी शादी अच्छे घर में करने का सपना संजोया था।
बताते हैं कि रिश्ते में लड़की के पिता ने दुपहिया से लेकर ट्रैक्टर तक देने की हामी भर ली थी, मगर लड़के पक्ष के लोग बोलेरो गाड़ी की डिमांड पर अड़े थे। नकद एक लाख रुपया उसने रिश्ते में दिया था।
गाड़ी की डिमांड जब किसान पूरी नहीं कर सका तो लड़के पक्ष ने रिश्ता तोड़ दिया। पहले तो घर के बड़ों में ही कानों कान इसकी चर्चा होती रही, लेकिन जब युवती को मालूम पड़ा तो वह समाज की इस कुप्रथा से हार गई। ऐसी जिंदगी जीने की बजाय मरना ही बेहतर समझा। बताते हैं कि जैसे ही परिवार के लोगों की निगाह बची वैसे ही कमरे में जाकर फांसी का फंदा बनाया और कुंडे में डालकर झूल गई।
नजारा देखते ही परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। फांसी के फंदे से उसको उतारकर डाक्टर के पास ले गए, मगर तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। हालांकि परिजनों ने दहेजलोभियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है। मन मारकर बेटी के गम को भुलाने की कोशिश कर रहे हैं।
रक्षाबंधन से पहले समाज से हार गई एक बहना
अमरोहा। 18 अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार है, जिसकी तैयारियों में लोग जोरशोर से जुटे हैं। लेकिन एक बहना समाज की बुराई से हार मान गई। उसने लड़ने की बजाय खुद को ही खत्म करने का अडिग फैसला कर लिया। किसी ने उसके दर्द को महसूस नहीं किया। परिवार के लोग भी तसल्ली देते रहे, मगर बार-बार उनकी जुबां पर रिश्ता टूटने का जिक्र रहा। आस पड़ोस में भी ये चर्चा फैल गई, जिस पर युवती ऐसा कदम उठाने को मजबूर हो गई।
पहले भी सामने आए हैं मामले
अमरोहा। दहेज की खातिर रिश्ता तोड़ने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी कई ऐसे मसले सामने आ चुके हैं, लेकिन समाज के ठेकेदार बुराई को खत्म करने की बजाय फैसला कराना ही बेहतर समझते हैं। अगर यही सिलसिला चलता रहा तो एक दिन भाई को बहन व बेटे को बहू नहीं मिल पाएगी।
ऐसी कोई सूचना थाने तक नहीं आई है। अगर शिकायत आती तो निश्चित ही पुलिस मामले में कार्रवाई करती, किन्तु कुछ नहीं आया।
ऋषि कुमार, एसओ देहात