जांच कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी। हालांकि, 108 एंबुलेंस के कोऑर्डिनेटर ने बताया कि हादसे के पांच मिनट बाद एंबुलेंस पहुंच गई थी। लेकिन, इससे पहले निजी एंबुलेंस घायलों को ले जा चुकी थी। हालांकि अब जांच कमेटी की रिपोर्ट में ही स्पष्ट हो पाएगा की पवनदीप के हादसे के बाद एम्बुलेंस मौके पर पहुंची थी या नहीं। वहीं, निजी एंबुलेंस चालक के घायल पवनदीप को अमरोहा व गजरौला को छोड़कर डिडौली के निजी अस्पताल में ले जाने की भी जांच की जाएगी।
उत्तराखंड में चंपावत जिले के सिलेन टाक निवासी गायक पवनदीप राजन पांच मई की रात साथी अजय मेहरा के साथ घर से कार से दिल्ली जा रहे थे। उन्हें एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हैदराबाद पहुंचना था। उनकी कार चालक राहुल सिंह चला रहा था। रात करीब ढाई बजे उनकी कार गजरौला क्षेत्र में चौपला चौराहा ओवरब्रिज से नीचे उतरी तो हाईवे किनारे सीओ (ऑफिस के सामने) खड़े कैंटर में घुस गई थी। हादसा चालक राहुल को झपकी आने के कारण हुआ था। हादसे में पवनदीप उनके साथी अजय मेहरा व चालक राहुल गंभीर रूप से घायल हो गए। गजरौला पुलिस ने निजी एंबुलेंस की मदद से तीनों घायलों को डिडौली में हाईवे स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया था।
जानकारी पर अस्पताल पहुंचे पवनदीप के पिता सुरेश राजन, माता सरोज राजन व अन्य परिजन तीनों को बेहतर इलाज के लिए नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल ले गए थे। हादसे में पवनदीप का बांया पैर व दाहिना हाथ फ्रैक्चर हो गया था। हादसे के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कोई कह रहा था कि हादसे के बाद एनएचएआई और 108 एंबुलेंस की ओर से कोई मदद नहीं मिली। यह भी चर्चा थी कि 108 पर सूचना दी गई, एंबुलेंस नहीं पहुंची थी।
गायक पवनदीप के हादसे में घायल होने का मामला पिछले दिन हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उठा था। जिसके बाद डीएम निधि गुप्ता वत्स ने सड़क दुर्घटना के बाद 1033 और 108 एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण की जांच के लिए जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर मसीहा नजम की अध्यक्षता में पांच सदस्य टीम गठित की है। टीम को 15 दिन में एंबुलेंस की अनुपलब्धता की तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट मांगी है।
टीम में यह लोग शामिल
डिप्टी कलक्टर मसीहा नजम, एआरटीओ प्रवर्तन महेश शर्मा, पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता मनोज कुमार त्यागी, टीएसआई और जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य अनिल कुमार जग्गा शामिल हैं।
कहीं कमीशनबाजी का खेल तो नहीं घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती करना :
लोगों की मानें तो दिल्ली-हाईवे पर सड़क हादसा होने के बाद 108 एंबुलेंस के पहुंचने से पहले निजी एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाती हैं। यह निजी एंबुलेंस नजदीकी अस्पतालों की बजाय अपने कुछ चुनिंदा अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करते हैं। इसके लिए लंबी दूरी ही क्यों न तय करनी पड़े। गायक पवनदीप के हादसे में घायल होने के बाद भी यही हुआ। 108 एंबुलेंस कोऑर्डिनेटर का कहना है कि हादसे की सूचना मिलने के पांच मिनट बाद ही एंबुलेंस पहुंच गई थी। लेकिन, इससे पहले घायलों को ले जाया जा चुका था। घायलों को ले जाने वाली सरकारी नहीं निजी एंबुलेंस थी।
इलाज को आखिर 25 किलोमीटर दूर क्यों ले गया एंबुलेंस चालक :
किसी भी दुर्घटना के बाद कोई भी व्यक्ति नजदीकी शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं को तलाशता है। गजरौला में जहां हादसा हुआ, वहां भी काफी अच्छे निजी अस्पताल हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन निजी एंबुलेंस का चालक इन दोनों नजदीकी जगहों को छोड़कर आखिर 25 किलोमीटर दूर डिडौली क्यों लेकर पहुंचा। आखिर क्यों चालक द्वारा गजरौला या अमरोहा के अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया। इस सवाल का जवाब तो जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
- प्रकरण में जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए पांच सदस्य कमेटी बनाई गई है। कमेटी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-निधि गुप्ता वत्स, डीएम